गांव गुहणा का अद्भुत दरवाजा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित धरोहर हरियाणा संग्रहालय को मिला

 

कहते हैं कुछ अलग करने की ललक अगर दिल में सवार हो जाए तो वो रातों को नींद नहीं आने देती। बात चाहे अभिनय की हो, साहित्य लेखन की हो, मिट्टी की मूर्तियां बनाने की  हो या फिर लकड़ी से बनाई जाने वाली किसी अन्य चीज की हो। दरअसल हरियाणा के कैथल जिले के गुहणा गांव में एक अनौखा लकड़ी का दरवाजा तैयार किया हुआ है जो देखने लायक है, लेकिन अब ये दरवाजा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में धरोहर की शोभा बढाएगा।

 

किसने बनवाया था दरवाजा 

बता दें कि इस दरवाजे को बनाने की शुरूआत स्व. चौ. जातीराम जी चहल पुत्र स्व. नौरंग राम चहल पुत्र लालचंद चहल, श्योचंद चहल जीतराम चहल, आभेराम चहल, चंदगी राम चहल ने सन 1951 ( संवत 1921 ) में की। मिस्त्री मुलाराम गांव सीशमर व उनका एक साथी दोनो ने मिलकर ये दरवाजा गेट लगभग 14 महीनो में बनाकर तैयार किया। उनकी मजदूरी देशी घी की रोटी व 5 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से थी।

संग्रहालय प्रभारी ने डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि यह दरवाजा अपने आप में अदभुत है। इस दरवाजे में 100 किलो से अधिक मेख लगाई गई हैं। इसके साथ ही दरवाजों के दोनों पल्लों पर राम लक्ष्मण, कृष्ण और लक्ष्मी की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं। इसके अलावा शीशम से बने इस दरवाजे पर हरियाणवी लोक परंपरागत शैली में चित्रकारी भी लकड़ी की खुदाई में अंकित है।

दरवाजा भेंट करने आए संदीप नितीश चहल ने बताया कि यह दरवाजा 20वीं सदी के आरंभ में बनाया गया था। इस दरवाजे को गांव शीशमर के मूला राम मिस्त्री ने 14 महीने में तैयार किया था। उस समय उनकी मजदूरी देशी घी से सनी रोटी और पांच रुपए दिहाड़ी प्रतिदिन के हिसाब से दी गई थी। उन्होंने बताया कि दरवाजे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग उनके घर आया करते थे। इसके साथ ही शुरू में जब यह दरवाजा बना तो बुजुर्गों ने छह महीने तक पर्दा लगाकर रखा था। हरियाणवी कलाकारी के अदभुत नमूने के रूप में यह दरवाजा हरियाणवी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संग्रहालय के प्रभारी डॉ. महासिंह पूनिया ने केयू प्रशासन की ओर से जाति राम चहल के परिवार के आभे राम चहल, चंदगी राम चहल, जीत राम चहल श्योचंद चहल का आभार जताया और प्रशस्ति पत्र सौंपा।

 

क्या है धरोहर

धरोहर हरियाणा के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र में बना एक संग्रहालय है जहां पौराणिक व पारंपरिक चीजों को रखा जाता है। आपको बता दें कि संग्रहालय निदेशक महासिंह पुनिया का इसके लिए खास योगदान रहा है। पुनिया अलग-अलग जगहों से पारंपरिक कारीगरी, बुनाई, कढाई एवं और भी कई सामान धरोहर के लिए उपलब्ध करवा चुके हैं।

Author

achoudhary15@gmail.com
अखिल चौधरी म्हारा हरियाणा पोर्टल के प्रमुख लेखक है। वे हरयाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। उनका उद्देश्य इस पोर्टल द्वारा हरयाणा की समय समायिक जानकारी के अलावा हरियाणा की भाषा, संस्कृति अवं लोक व्यव्हार को इंटरनेट के जरिये विश्व पटल पर लाना है।

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