दोस्तो हमने रक्षाबंधन तो मना लिया ! पर क्या ये जरूरी नहीं है कि जान लें कि रक्षा सूत्र का असल में क्या महत्व है!

रक्षा बंधन का त्यौहार आज के परिप्रेक्ष्य में

 

प्राचीन काल में रक्षा सूत्र का महत्व कुछ अलग प्रकार से था –
रानी राजा को रक्षा सूत्र बांधती थी जब वह शत्रु से युद्ध के लिए जाता था! इस रक्षा सूत्र को बांधकर रानी कामना करती थी कि राजा युद्ध में विजय प्राप्त करे ताकि वह उसकी (पत्नी) की जीवन भर रक्षा कर सके! उस समय शत्रु जब विजयी हो जाता था तो स्त्री जाति की हालत सबसे खराब हो जाती थी !पराजित राजा की रानी एवं अन्य महल की स्त्रियों के साथ बदसुलूकी की जाती थी! उनका यौन शोषण तक किया जाता था! इसीलिए अधिकतर पराजित राजा के परिवार की स्त्रियों को जब यह सूचना मिलती कि राजा युद्ध भूमि में मारा गया तो वह जौहर कर लेती थी!

प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार देवताओं और दानवो के बीच युद्ध चल रहा था जिसमे दानवो की ताकत देवताओं से कई गुना अधिक थी. देवता हर बाजी हारते दिखाई पड़ रहे थे. देवराज इंद्र के चेहरे पर भी संकट के बादल उमड़ पड़े थे. उनकी ऐसी स्थिती देख उनकी पत्नी इन्द्राणी भयभीत एवं चिंतित थी. इन्द्राणी धर्मपरायण नारी थी उन्होंने अपने पति की रक्षा हेतु घनघोर तप किया और उस तप से एक रक्षासूत्र उत्पन्न किया जिसे इन्द्राणी ने इंद्र की दाहिनी कलाई पर बांधा. वह दिन श्रावण की पूर्णिमा का दिन था. और उस दिन देवताओं की जीत हुई और इंद्र सही सलामत स्वर्गलोक आये. तब एक रक्षासूत्र पत्नी ने अपने पति को बांधा था!
रानी कर्मवती ने हुंमायूं को रक्षा सूत्र भिजवा कर अपने राज्य की रक्षा की अपेक्षा की थी और हुंमायूं ने रक्षा सूत्र का फर्ज अदा कर कर्मवती के राज्य को बचाया!
ब्रहाम्ण अपने राजा को बांधते थे ताकि राजा सदैव उनकी व प्रजाजन की रक्षा करे! रक्षा सूत्र बांधकर बहन अपने भाई से जीवन भर अपनी रक्षा करने की कामना करती थी कि उसका भाई उसकी रक्षा करेगा !ससुराल में भी अगरउसके साथ कुछ गलत घटता है तो भाई उसकी मदद करेगा !

नारी शारीरिक बल में पुरुषों से कमजोर होती हैं!इस कारण सुरक्षा की दृष्टी से इस सुंदर त्यौहार को बनाया गया पर कलयुग के दौर में परिपाठी बदलती ही जा रही हैं!यह परम्परा जो समाज में एक सहयोग के भाव के साथ उपजी थी सिर्फ भाई -बहन के नाम पर मात्र एक औपचारिक त्यौहार बनकर रह गयी है ! इसके सही मायने बदलते जा रहे हैं !
यह परम्परा सबसे पहले तो सिर्फ भाई -बहन पर आ कर सिमट गई है! इतने सीमित दायरे में इतनी शुभ परम्परा का सिमटना समाज के नैतिक विकास के लिए सही नहीं है! इतना ही नहीं आज बहन भाइयों को राखी बाँधती है और उम्मीद करती है कि भाई उसे अच्छा व कीमती सा तौहफा दे! अगर भाई परिस्थिति वश ऐसा नहीं कर पाता तो वह बहन के दिल से उतर जाता है! रही बात रक्षा की तो आज के वक्त में हर कोई भौतिकता की दौड़ में शामिल हों गए हैं! आज भाई के पास बहनों के पास बैठकर बात करने का भी वक्त नहीं है! त्यौहार के बहाने साल में एक दिन भाई बहन मिलते हैं! बहने भी रक्षा के बजाय मंहगा उपहार पाकर संतुष्ट है!
भौतिक दोड में शामिल भाई बहन कच्चे धागे के असल मूल्य को भूल चुके हैं! वर्ष में एक दिन के लिए प्यार जगता है जो राखी के मूल्य (कीमती राखी) और मंहगे तौहफों पर आ कर खत्म हो जाता है!

कुछ वाकये तो ऐसे सामने आते हैं कि जिससे मानवता भी शर्मसार हो जाती है!
गरीब बहन अगर दुखी है तो भाई पिंड छुडाते फिरते है डर रहता है कि बहन तकलीफ में है कुछ मदद न मांग ले! कहीं ऐसा हुआ तो धर्म संकट आ जाएगा!
रक्षा सूत्र के मूल्य को क्या समझेंगे ये लोग ? फिर रक्षाबंधन पर एक दिन के लिए रक्षा सूत्र का आदान प्रदान हो जाते हैं और हो गया रक्षाबंधन!
कहीं कहीं बहने भी भाई की पॉकेट देखकर उसी के साइज के आधार पर राखी खरीदती हैं!
इस तरह से इस परम्परा का निर्वहन हमारे समाज के लिए घातक है! हमें वापस पीछे मुड़कर देखना होगा! जो शुभ हो उसे पूर्णता के साथ अपनाना होगा! सुप्त परम्परा को जाग्रत करने की आवश्यकता है! कुछ परम्परायें जो समाज के भले में सहायक है उनके प्रति नव चेतना की आवश्यकता है!परम्परा में पुनः विस्तार करने की आवश्यकता है!
कई जगह पर पत्नी अपने पति को राखी बांधती हैं! पति अपनी पत्नी को रक्षा का वचन देता हैं!सही मायने में यह त्यौहार नारी के प्रति रक्षा की भावना को बढ़ाने के लिए बनाया गया हैं!समाज में नारी की स्थिती बहुत गंभीर हैं क्यूंकि यह त्यौहार अपने मूल अस्तित्व से दूर हटता जा रहा हैं! जरुरत हैं इस त्यौहार के सही मायने को समझे एवम अपने आस पास के सभी लोगो को समझायें!अपने बच्चो को इस लेन देन से हटकर इस त्यौहार की परम्परा समझायें तब ही आगे जाकर यह त्यौहार अपने एतिहासिक मूल को प्राप्त कर सकेगा!
अब आईए सही मायने में रक्षा सूत्र बांधने और बंधवाने का संकल्प लें केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं!

– अमृता अंजुम

Author

achoudhary15@gmail.com
अखिल चौधरी म्हारा हरियाणा पोर्टल के प्रमुख लेखक है। वे हरयाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। उनका उद्देश्य इस पोर्टल द्वारा हरयाणा की समय समायिक जानकारी के अलावा हरियाणा की भाषा, संस्कृति अवं लोक व्यव्हार को इंटरनेट के जरिये विश्व पटल पर लाना है।

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