जीवन परिचय; अनीता कुंडू; एक बार नहीं दो बार माउंट एवेरेस्ट चढ़ने वाली बनी पहली भारतीय महिला

हरियाणा पुलिस में कार्यरत अनिता कुंडु बनी चीन की ओर से माउंट एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला

 

अनीता कुंडू चाइना व नेपाल दोनों रास्तों से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बन चुकी हैं। दुनिया की सबसे मुश्किल पर्वत श्रंखलाएं भी इस हरियाणा की इस धाकड़ छोरी का रास्ता रोक नहीं पाईं, उसने चीन की तरफ से चढ़ाई कर दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराया है।

कुंडू, जो हिसार की नवदीप काॅलोनी में रहती हैं  मूलरूप से फरीदपुर गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने 11 अप्रैल 2017 को अपना अभियान शुरू किया, लेकिन चढ़ाई के दौरान जल्द ही उनसे संपर्क टूट गया। 20 अप्रैल को, यह ख़बर आयी  कि वह शिखर से कुछ 1,100 मीटर की दूरी पर थी और अगले दिन, उन्होंने माउंट एवेरेस्ट पर भारतीय ध्वज फहराया। वह दो साल पहले भी इसी रास्ते से चढ़ाई करने गई थी, मगर भूकंप आने की वजह से मिशन बीच में छोड़कर लौटना पड़ा था। उसने हार नहीं मानी, जिद थी कि बाधाओं को रौंदकर चढ़ना है। आखिरकार दूसरे प्रयास में उसने 8848 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। अनीता से पहले हरियाणा की संतोष यादव और ममता सौदा भी एवरेस्ट पर तिरंगा फरहा चुकी हैं। संतोष यादव रेवाड़ी से हैं और उन्हें बचपन से ही पहाड़ बहुत लुभावने लगते थे। वैसे एवरेस्ट पर चढ़ते समय ही शायद जिंदगी में सांसों का मोल पता चलता हो। एवरेस्ट पर सबसे पहले हिलेरी और तेनसिंध ने कदम रखे थे। तेनसिंध एक शेरपा थे और पर्वतारोही दल में सहायक के रूप में शामिल थे। आखिर हिलेरी के साथ वही चोटी तक पहुंच सके। खैर, एवरेस्ट की कहानी फिर सही।

8 में से 5 ने बीच में छोड़ दिया था सफर
अनीता के दल में 8 पर्वतारोही थे, लेकिन आखिरी पड़ाव पर आते-आते सिर्फ 3 ही रह गए थे। अन्य 5 ने अपने सफर को बीच में ही रोक दिया और वापस आ गए। इसके बाद अंतिम पड़ाव पर एक विदेशी पर्वतारोही की मौत हो गई। जिससे अंतिम पड़ाव में सिर्फ अनिता व एक अन्य विदेशी पर्वतारोही ही रह गए थे।

वर्ष 2008 में अनीता हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुई। 2011 में उन्होंने लेह-लद्दाख की 22 हजार फीट ऊंची चोटी पर चढ़ाई की। 2011 में ही अनीता ने उत्तराखंड की सतोपंथ की 23 हजार फीट ऊंची चोटी पर चढ़ाई की। इसके बाद अनीता ने नेपाल के रास्ते से 18 मई 2013 को एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। वर्ष 2015 में अनीता चाइना की ओर से एवरेस्ट फतेह करने के लिए गई। भूकंप के कारण चाइना सरकार ने अभियान बीच में ही रद्द करा दिया था।


हिसार, हरियाणा और भारत का गौरव अनीता कुंडू ने बढ़ा दिया। आईये सुनते हैं अनीता से ही क्यों और कैसे उन्होंने ये चुनौती स्वीकार की व् उन्हें किन किन मुश्किलों से झूझना पड़ा। पुरस्कार या पैसे लिए कोई एवरेस्ट पर नहीं चढ़ता। यह तो एक जुनून होता है। इस जुनून और जज्बे को सलाम, अनीता कुंडू।