जीवन परिचय; बंसीलाल; हरियाणा के माने जाते हैं विकास पुरुष और लौह पुरुष


चौधरी बंसीलाल (जन्म- 26 अगस्त, 1927; मृत्यु- 28 मार्च, 2006)

श्री बंसीलाल; हरियाणा के भिवानी जिले के गोलागढ़ गांव के जाट परिवार में जन्मे इस हरियाणा के कद्दावर नेता को आज भी लोग सम्म्मान के साथ याद करते हैं। बंसीलाल का जन्म हरियाणा के भिवानी ज़िले में एक तत्कालीन लोहारू रियासत में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था बंसीलाल के पिता बच्चों की अधिक शिक्षा के पक्ष में नहीं थे। इसीलिए थोड़ी आरम्भिक शिक्षा के बाद 14 वर्ष की उम्र में ही बंसीलाल को अनाज के व्यापार में जोत दिया गया। पिता की अनुमति न मिलने पर भी बंसीलाल ने अध्ययन जारी रखा और 1952 तक प्राइवेट परीक्षाएँ देते हुए बी.ए. पास कर लिया। फिर उन्होंने 1956 में पंजाब विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री ले ली। भिवानी में वकालत करते हुए बंसीलाल पिछड़े हुए किसानों के नेता बन गए। बंसीलाल ने कांग्रेस की अनेक स्थानीय समितियों में भी स्थान बना लिया और 31 मई 1968 को वह 41 वर्ष की आयु में सबसे कम उम्र के राज्य के मुख्यमंत्री बने, उस समय किसी ने भी, यहां तक कि उनके राजनितिक गुरुओं ने भी कल्पना नहीं की कि वह देश के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं में से एक बन के उभरेंगे। उन्होंने हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य पर इतना ज्यादा प्रभाव डाला था कि वह समय समय पर नीचे जरूर जाते पर हरियाणा की राजनीती से कभी बहार नहीं हुए।

श्री बन्सी लाल जी के राजनीतिक जीवन को तीन चरणों में सारांशित किया जाता है। अपने मुखयमंत्री बनने के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने राज्य के विकास, गांव गांव बिजली और सडकों का जाल बिछाने में अपना पूरा योगदान दिया। वह विकास में बुनियादी ढांचे के महत्व को समझने वाले पहले व्यक्ति थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि हरियाणा आज गोवा में प्रति व्यक्ति आय के बाद दूसरे स्थान पर है। बेशक, दिल्ली से इसकी निकटता ने भी मदद की पर इस गुनी नेता ने हरियाणा की नीव बिछाने का काम बहुत पहले ही शुरू कर दिए था। राजनीतिक नतीजे चाहे जो भी हों , अगर उन्होंने सोचा कि कोई चीज उनके राज्य के हित में हैं तो  चार बार  हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे इस नेता ने अप्रिय निर्णय लेने से संकोच भी कभी नहीं किया।

उनके राजनीतिक जीवन के दूसरे चरण में केंद्र सरकार में उनकी भूमिका रही। । राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उनके कड़े व् सटीक तरीकों ने उन्हें सबसे पहले इंदिरा गांधी और बाद में संजय गांधी के करीब ला खड़ा किआ। केंद्र में एक मंत्री के रूप में उनकी भूमिका के बारे में लिखने के लिए बहुत ज़्यादा नहीं है, वहां उन्हें सिर्फ एक गाँधी परिवार के करीबी के रूप में पहचान मिली, जो हमेशा गाँधी परिवार के ठीक या गलत दोनों ही फैसलों में साथ खड़े दिखाई दिए. वह और संजय गांधी हमेशा आपातकाल राज में हुए कामों से जुड़े रहेंगे। बाद में राजीव गांधी के साथ खराब होते हुए रिश्तों की वजह से  राज्य की सक्रिय राजनीति में लौटे।

मुख्यमंत्री के रूप में अपने आखिरी कार्यकाल के दौरान, श्री बन्सी लाल ने 1996 में हरियाणा में शराब पर प्रतिबंध लगाकर सार्वजनिक क्रोध का सामना करना पड़ा । इसके मूल्य का भुगतान भी करना पड़ा और वे अगले बार हुए चुनाव में हार गए । ये उनका आखिरी चुनाव भी साबित हुआ क्यूंकि उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करते हुए राजनितिक जीवन से सन्यास ले लिए व् राजनीती में अपनी संतान को आगे बढ़ाया। एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनके बेटे सुरेंद्र सिंह की अचानक मौत हो गई थी, जिस से न केवल उनकी राजनीतिक गणना में बल्कि उनके स्वास्थ्य में भी बड़ा झटका लगा। उनके कुछ दोषों अवदोषों को दूर रख दे तो, श्री बंसी लाल हरियाणा के इतिहास में  एक विकास पुरुष के रूप में सदैव जाने जाएंगे, जो विषम परिस्थितिओं में भी कड़े फैसले लेने से कभी नहीं चुके।

चौधरी बंसी लाल आजादी से पहले से ही राजनीति में सक्रिय थे। 1943-44 में लोहारू प्रजा मंडल के सेक्रेटरी थे।

चौधरी बंसी लाल 7 बार हरियाणा विधानसभा  से चुने गए । 1968 में वो पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने ।  वे भगवत दयाल शर्मा एवं राव बीरेंद्र सिंह के बाद हरियाणा के तीसरे मुख्यमंत्री थे। उनके कार्यकाल में हरियाणा  अपने सभी गाँवों में बिजली पहुंचाने वाला देश में पहला प्रदेश बना । देश के कुछ गाँवों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है वहीँ हरियाणा के गाँवों में चौधरी बंसीलाल ने 1970 में बिजली पहुँचा दी थी । हरियाणा के गाँवों में सिंचाई का पानी लाने का श्रेय भी बंसीलाल को ही जाता है ।

1972 में वो दोबारा हरियाणा के मुख्यमंत्री बने नवम्बर ।

1975 में उन्हें भारत के रक्षामंत्री बनाया गया। आपातकाल के दौरान वो संजय गांधी के विश्वसनीय माने जाते थे । बंसीलाल को आपातकालइ लिये गए बहुत से विवादस्पद निर्णयो के लिये जिम्मेदार माना जाता है 1984 में वो रेलवे मंत्री भी बने

1986 में वे एक साल के लिये फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री बने ।

1996 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा विकास पार्टी बनाई और 1997 मेंबीजेपी गठबंधन के साथ हरियाणा में शराबबंदी के वादे के साथ सरकार  बनाई । प्रदेश में शराब बंदी पूर्ण रूप से असफल रही । जुलाई 99 में बीजेपी ने अपना समर्थन इनलो को देकर सरकार गिरा दी । 2005 में हविपा का कांग्रेस में विलय हो गया ।

2005 में उनके पुत्र और राजनैतिक उत्तराधिकारी सुरेन्द्र सिंह की हवाई दुर्घटना में मौत हो जाने से वो टूट गए और  28 मार्च 2006 को उनका भी निधन हो गया ।

बंसीलाल की 28 मार्च 2006 को नई दिल्ली में मृत्यु हो गई। वे कुछ समय से बीमार थे।

चौधरी बंसी लाल के बड़े बेटे चौधरी रणबीर सिंह महेंद्र, बीसीसीआई (BCCI) के  पूर्व अध्यक्ष हैं एवं चौधरी बंसीलाल के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते, उन्हें स्वाभाविक रूप से चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी देखा जाता है।

चौ.बंसी लाल बहुत ही सख्त किस्म के इंसान थे | उनके किस्से आज भी गाँव देहात में सुन ने को मिल जाते हैं। भिवानी में लोग उन्हें बाऊ जी बुलाते थे | कोठी में उनका इतना खौफ था की जब वो बाहर निकलते थे तो वहा बैठे वर्कर कुण टोह्नी शुरू कर दिया करते | ऐसे अनाड़ी थे की पड़ोस में खुद की पोती का ब्याह था पर खुद कन्यादान करन नहीं गए | एक बार जो फैसला ले लेते थे उससे पीछे नहीं हटते थे | 99 में सरकार जाने के बाद एक बार जींद में रैली करी थी विकास पार्टी ने , रैली से पहले सुरेंदर सिंह ने कहीं पत्रकारों से कह दिया की अगर हमारी सरकार दुबारा आई तो हम बिजली के बिल मांफ कर देंगे , जब यह बात पत्रकारों ने चौ.बंसी लाल से पूछी तो चौ.साहब ने कहा की ” सुरेंदर सी.एम बनेगा तो कर देगा पर चौ.बंसी लाल तो करे कोणी ” |
बिजली के बिलों पर लोहारू बाढ़ड़ा में किसानो ने खूब बवाल मचाया , इन बिलों के चक्कर में चौ.भजन लाल सरकार में कादमा काण्ड हुआ कई किसान शहीद हुए …इस चक्कर में 96 में कांग्रेस बुरी तरह हार गई और विकास पार्टी की सरकार में आ गई …चौ.बसी लाल की सरकार बनने के बाद फिर यह बिलों वाला मुद्दा उठा तो चौ.बंसी लाल ने बाढ़ड़ा में एक रैली में कहा की बिल भर देना नहीं तो मुझे भरवाने भी आते हैं ..ताहरे डोगे अर्र खंडुए झाड़िआं के टंगवा द्यूंगा नही भरे तो ….ऐसे बेबाक हरियाणवी नेता थे चौधरी बंसी लाल।

उन्हें भाषण बाजी कम ही पसंद थी , जैसा की चौटाला साहब अपने भाषण में सबको इज्जत देते हैं चौ.बंसी लाल जी इसके जम्मा उलटे थे ….एक बार 97 की बात है लोहारू में रैली थी…..उन्होंने चौटाला साहब पर एक व्यंग कसा की इस चौटाला ने अपनी माँ के पेट में त लिकड़न में 24 घंटे लगा दिए थे , इसकी माँ बहुत रोई …इसकी माँ ने रोती देख दाई बोली के बावली इबे तो तू रोवे स आगे आगे इसने पूरा हरियाणा रोवेगा …..और आखिर में बोले के भाई शास्त्रों में लिखा हैं की जिस राज्य का राजा अपंग हो वो राज्य विकास नहीं कर सकता उसका नास ही होगा , एक लंगड़ा स और दूसरा काणा (भजन लाल ) स तो सोच समझ के फैसला करियो ……..

ऐसे कई किस्से स चौ.बंसी लाल जी के ……….

तोशाम व भिवानी का इलाका और बंसीलाल एक दूसरे के पर्याय यूं ही नहीं बने, दोनों के बीच करीब चार दशक का गहरा राजनीतिक संबंध रहा। इस धरती से जीत कर बंसीलाल ने लगभग 12 साल प्रदेश की बागडोर संभाली। तोशाम विधानसभा से बंसीलाल कुल छह बार चुनाव लड़े और सभी जीते। वहां आज भी उनके नाम पे कई कॉलेज व् पॉलिटेक्निक खोले गए हैं। इसके अलावा आज भी उनकी राजनितिक विरासत को बरक़रार रखते हुए बंसी लाल की पोती श्रुति चौधरी कांग्रेस से भिवानी की सांसद हैं।