जीवन परिचय; योगेश्वर दत्त; आखिर क्या बात थी कि मात्र 8 साल का बच्चा सबकुछ छोड़कर पहलवानी में कूद पड़ा

यदि यूं कहें कि हरियाणा में पहलवानों का खजाना है, तो गलत नहीं होगा। सुशील कुमार, नरसिंघ यादव, गीता फोगट, साक्षी मलिक ऐसे नाम है, जो हरियाणा के ही नहीं, बल्कि भारत के भी शान है। पर इन नामों में योगेश्वर दत्त को भुलाया नहीं जा सकता, जिन्होंने अपने सपनों का सफर हरियाणा के एक छोटे से गाँव से की थी, लेकिन आज वो अपने अदम्य साहस और उत्क्रष्ट खेल शैली से भारत का नाम ना केवल एशिया में ही ऊंचा किया, बल्कि विश्व पटल पर भी किया।

 

 
व्यक्तिगत जानकारी
उपनाम योगी, पहलवान जी
जन्म 2 नवम्बर 1982 (आयु 34)
भैंसवाल कलाँ, गोहाना, जिला सोनीपत, हरियाणा
निवास हरियाणा
ऊंचाई 5 फीट 7 इंच (1.70 मी.)
माता एवं पिता का नाम सुशीला देवी (शिक्षक)

राममेहर (शिक्षक)

योगेश्वर दत्त का जन्म 2 नवंबर 1982 हरियाणा के सोनीपत में हुआ था। योगी बहुत ही शिक्षित परिवार से सम्बन्ध रखते हैं. उनकी माता अवं पिता दोनों ही शिक्षक के रूप में कार्यत हैं. यहाँ तक के उनके दादा जी भी शिक्षक थे. परिवार की ीचा थी की योगेश्वर भी पढ़ लिख कर उनके नक़्शे कदम पर चले पर किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही चुना था. उनके गाँव का माहौल खेलों वाला था, खासकर पहलवानी का। उनके गाँव में बलराज नाम का पहलवान बड़ा मशहूर था, जिससे योगेश्वर 8 साल की उम्र में इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पहलवानी सीखने की ठान ली। पहली बार सन १९९२ में जब योगी केवल पांचवी कक्षा में पढ़ रहे थे तब उन्होंने स्कूल स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता जीती। यहीं से योगी के परिवार ने उनके कुश्ती के प्रति रुझान को समझा और उन्हें पूरा पूरा प्रोत्साहन दिया। फिर उन्होंने पीछे मुद के नहीं देखा। चाहे वो १९९४ में पोलैंड में हुए इंटरनेशनल स्कूल कैडेट खेल प्रतियोगिता हो या फिर अस पास हो रहे दंगल उन्होंने अपनी म्हणत और कुश्ती के प्रति लगन से अपना नाम स्वयं बनाया।

सन १९९६ में वे अपनी पढाई पूरी कर दिल्ली के छतरसाल स्टेडियम में स्थानांतरित हो गए और अपना पूरा वक्त कुश्ती को समर्पित करने लगे।इसके बाद कई लोकल व् राष्ट्रीय स्तर पर पर पहलवानी प्रतिस्पर्धा जीतने के बाद 1999 के World Championship में गोल्ड जीतकर पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी को पेश किया।

2003

योगेश्वर दत्त ने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत २००३ में आयोजित लंदन commonwealth खेलों से की जहाँ उन्होंने ५५ किलोग्राम फ्रीस्टाइल कटोगरी में स्वर्ण पदक जीतकर वह वही बटोरी। वे सन २००४ में भी एथेंस ओलंपिक्स कुश्ती टीम का हिस्सा रहे जहा ५५ किलो भर वर्ग में उन्हें १८ वे स्थान से संतोष करना पड़ा।

2006 Asian Games

२००६ के १५ वे एशियाई खेलों में केवल ९ दिन का समय शेष था योगी के पिता का देहांत हो गया। परिवार के काफी मानाने के बाद ही ये झुझारू पहलवान खेलों में शिरकत करने को तैयार हुआ। पर शया योगी के लिए और भी परीक्षाएं बाकि थी। उन्हें न केवल मानसिक परन्तु घुटने की शारीरिक चोट ने भी काफी परेशां किया। पर हरयाण की मिटटी में पीला बढे इस पहलवान ने सब दर्द भुला कर ६० किलोग्राम भर वर्ग में भारत को कांस्य पदक हासिल कराया।

2008 Summer Olympics

यह योगेश्वर का दूसराओलंपिक था। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 2008 में दक्षिण कोरिया के जेजू सिटी में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर ओलंपिक के लिए अपना स्थान अर्जित किया। हालांकि ओलंपिक्स में उनका प्रदर्शन सामान्य ही रहा व् उनको ९ वे स्थान से संतोष होना पड़ा।

2010 Commonwealth Games

2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में, योगेश्वर ने 60 किलोग्राम वर्ग में चोट से लड़ते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक अर्जित किया। योगेश्वर ने ये स्वर्णिम  फाइनल तक का सफर विश्व के जाने मने पहलवान ऑस्ट्रेलियाई मूल के  फ़ारजाद ताराश (16-0, 17-0), दक्षिण अफ्रीकी मारियस लूट्स (7-1) और इंग्लैंड के साशा माडियार्किक (4-4, 8-0)  को अपने कुशल प्रदर्शन से पटकनी देते हुए पूरा किआ ।

2012 Summer Olympics

योगेश्वर ने २०१२ ओलंपिक्स के लिए कज़ाखिस्तान में हुए क़्वालिफिएर मुकाबले में सिल्वर मैडल जित कर अपनी जगह पक्की की।

इसके पश्चात लंदन में आयोजित 30 वीं ओलंपिक खेलों में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 60 किग्रा श्रेणी में एक यादगार प्रदर्शन करते हुए योगी ने भारत को कांस्य पदक दिलाया।  इस प्रकार सन १९५१ में के डी जाधव व् २०१२ में सुशिल कुमार के बाद योगी ओलंपिक्स खेलो में पदक लेन वाले तीसरे पहलवान बने। उनका आखरी शानो में पैर पकड़ने वाला दांव आज भी शायद ही कोई भारतीय भुला होगा वार्ना नीचे दिए हुए वीडियो से यादें ताजा कर ली जिए।

२०१२ में भारत सरकार द्वारा इन्हें राजीव गाँधी खेल रत्न का सम्मान दिया गया।

2014

सन २०१४ में ग्लासगो में आयोजित कोम्मोंवेल्थ कुश्ती प्रतियोगिता के ६० किलोgram भर वर्ग में योगेश्वर ने भारत का प्रतिनिध्त्वि किया और आशा के अनुरूप स्वर्ण पदक अर्जित करके देश का गौरव बढ़ाया। इसी साल हुए एशियाई खेलों में भी अपना दबदबा कायम रखते हुए ६५ किलो भर वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किआ।

सन २०१६ में हुए रिओ ओलंपिक्स में योगी जगह बनाने में जरूर सफल हुए पर उनका प्रदर्शन साधारण रहा।

सन २०१५ में शुरू हुए प्रो कुश्ती लगे के पहले संस्करण में योगेश्वर हरयाणा हम्मेर्स की टीम के कप्तान बने व् हर साल इसमें शिरकत कर रहे हैं। 33 साल के योगेश्‍वर अपने आप को राष्‍ट्रवादी मानते हैं। योगेश्‍वर के दोस्‍त बताते हैं वे अपने स्‍पष्‍टवादी हैं और कभी अपने मत केा छुपाते नहीं हैं। जेएनयू मामले के दौरान किए गए उनके ट्वीट ने काफी सुर्खियां बटोरी थी। इसके बाद जब सलमान खान को रियो ओलंपिक के लिए गुडविल एंबेसेडर बनाया गया तब भी योगेश्‍वर ने ट्वीट कर इस बात पर निशाना साधा था। नरसिंह यादव और सुशील कुमार के बीच रियो जाने को लेकर हुए तक विवाद में भी उन्‍होंने नरसिं‍ह की पैरवी की थी।

भारतीय कुश्ती चैंपियन योगेश्वर दत्त ने हाल ही में अपने जीवन में एक नया चरण शुरू किया। 33 वर्षीय ओलंपियन ने 16 जनवरी, 2017 को शीतल से शादी की। योगी ने एक बार फिर भारतीय युवाओं को सही दिशा दिखते हुए शादी में दहेज़ लेने से इंकार किया व् वधु पक्ष से शगुन के रूप में सिर्फ एक रुपया ही स्वीकार किया। उनकी धरम पत्नी शीतल शर्मा हरयाणा में कांग्रेस के नेता श्री जयभगवान शर्मा की सुपुत्री हैं।


भारत का राष्ट्रीय अवं अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके इस खिलाडी ने न केवल हरयाणा का बल्कि पुरे देश का नाम रोशन किआ है। योगेश्वर आज भी मिटटी से जुड़े हैं व् चकचोँद से दूर अपना पूरा समय कुश्ती को देते हैं। इंडिया वौइस् के सौजन्य से निचे दिया हुआ उनका ये इंटरव्यू आपको उनके सीधे व् साधारण जीवन कुश्ती के प्रति उनकी लगन व् मेहनत तथा उनके जेवण के कुछ अनछुए पहलुओं से रूबरू कराएगा।