हरियाणा के किसानों को खेती की उन्नत तकनीक सीखा रहा है घरौंडा में स्थित इंडो – इजराइल सेंटर

दुनिया में सबको भरपेट खाना मिले और जो खेतों में उगाया जा रहा है उसे सुरक्षित रखा जा सके ये बहुत बड़ी समस्या है। अकेले भारत में हर साल बिना रखरखाव के अरबों रुपये का अन्न बर्बाद हो जाता है। कभी सूखे से बिना पानी फसलें सूख जाती हैं तो कभी बाढ़ के सैलाब में खेत के खेत बर्बाद हो जाते हैं। जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में खेती और खाद्य सुरक्षा जरूरी होता जा रही है।

भारत ही नहीं दुनिया का लगभग हर देश इन समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन युवा किसानों का देश कहे जाने वाले इजरायल ने खेती से जुड़ी कई समस्याओं पर न सिर्फ विजय पाई है बल्कि दुनिया के सामने खेती को फायदे का सौदा बनाने के उदाहरण रखे हैं। अब इसी इजरायली तकनीक से हरियाणा में किसानो को न केवल सब्जियां उगाने की नयी दिशा दी है बल्कि पैदावार के नए आयाम छूने का मौका दिया है।

खड़ी या लंब (वर्टिकल) खेती, टपक (ड्रिप) सिंचाई, मृदा सौरीकरण और इसी तरह की कुछ और शब्दावलियों से 40 साल के किसान दीपक खातकर तब तक खासे परेशान थे जब तक कि वो दो साल पहले पहली बार सब्जियों की बेहतरी के लिए गठित भारत-इजरायल उत्कृष्ट केंद्र नहीं पहुंच गए। कौतूहल या जानने की इच्छा के चलते उन्होंने इजरायली खेती के कौशल को अपनाया और कुछ महीने के भीतर ही उत्पादन में उन्हें चौंकानेवाला पांच गुना तक का इजाफा देखने को मिला।

हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से 145 किलोमीटर दूर स्थित छह हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केंद्र को जनवरी 2011 में खोला गया। भारत सरकार ने छह करोड़ की लागत से इसकी स्थापना 2008 में भारत और इजरायल के बीच हुए कृषि सहयोग समझौते के तहत की थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर करनाल जिले के शेखपुरा खालसा गांव के खातकर कहते हैं, ‘हम लोग अपने खेतों में गेहूं और जौ की खेती परंपरागत तरीके से करते आ रहे थे लेकिन केंद्र पर जो तकनीक मैंने सीखी उसने मुझे सब्जी उत्पादन में हाथ आजमाने को बाध्य कर दिया।‘

करनाल में बागवानी के उपनिदेशक दीपक कुमार दत्तरवल ने कहा, 2010-11 में केंद्र खोले जाने के बाद उन्होंने 15,000 किसानों को प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने कहा, किसान बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि पारंपरिक फसलों मसलन गेहूं व धान के मुकाबले इसमें ज्यादा लाभ है। अन्य कारण मिट्टी का क्षरण, जमीन के आकार में सिकुडऩ और भूजल का गिरता स्तर है। हरियाणा सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 44.23 लाख हेक्टेयर में से करीब 50 फीसदी क्षेत्र मिट्टी क्षरण, लवणता और जलजमाव आदि से समस्याग्रस्त है। साथ ही जरूरत से ज्यादा पानी के दोहन के चलते कुल 22 जिले में से 10 को पहले से ही डार्क जोन में रख दिया गया है। लेकिन इजरायल की तकनीक के फायदे और बढ़ते लाभ के बावजूद हरियाणा में बागवानी में तेज रफ्तार से इजाफा नहीं हो रहा है। किसानों व विशेषज्ञों ने कहा कि यह मुख्य रूप से उच्च निवेश और इससे जुड़े जोखिम के चलते है। एक एकड़ में पॉलि हाउस स्थापित करने की लागत करीब 30 लाख रुपये है, जिसमें से 65 फीसदी हरियाणा सरकार से सब्सिडी मिलती है।

इस केंद्र में प्रशिक्षण के बाद एक किसान अवतार सिंह ने अपने खेत में पॉली हाउस स्थापित किया और आज खीरा और शिमला मिर्च की पैदावार खुले खेत के मुकाबले चार गुना बढ़ गई है। साथ ही आय में भी चार गुने का इजाफा हुआ

चार साल पहले हरियाणा के कैथल जिले के 42 वर्षीय किसान अवतार सिंह गुड़गांव से गुजर रहे थे तो उन्होंने पहली बार एक खेत में काफी ज्यादा पॉलि हाउस (उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की रक्षा के लिए पॉलीथीन से बना घर) देखा। कुछ रिश्तेदारों से पूछताछ करने के बाद वह करनाल में 2010-11 में स्थापित इंडो-इजरायल परियोजना सेंटर एक्सिलेंस फॉर वेजिटेबल पहुंच गए। सिंह को वहां इजरायल की कृषि तकनीक, कम लागत वाली ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था और रोगमुक्त पौध बनाने के बारे में जानकारी मिली। उन्हें बिना सीजन वाली सब्जी उगाने का तीन दिन का प्रशिक्षण मिला। सिंह ने कहा, प्रशिक्षण के बाद हमने अपने खेत में पॉलि हाउस स्थापित किया और आज खीरा और शिमला मिर्च की पैदावार खुले खेत के मुकाबले चार गुना बढ़ गई है। साथ ही आय में भी चार गुने का इजाफा हुआ।



इजरायल के विशेषज्ञ लगातार केंद्र का दौरा करते रहते हैं और किसानों के लिए मुफ्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन करते हैं। इसमे उन्हें ‘रक्षात्मक कृषि’ के बारे में जानकारी दी जाती है और बताया जाता है कि कैसे पानी और खाद का कम से कम इस्तेमाल करते हुए ज्यादा फसल उगाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ भी केंद्र का दौरा करते हैं। इसके अतिरिक्त, कॉर्पोरेट और पेशेवर लोगों को भी नाममात्र फीस में गुणवत्तावाली सब्जियों के उत्पादन के बारे में पढ़ाया जाता है।

हरियाणा में घरौंडा में खोले गये इस सब्जी उत्कृष्टता केंद्र की सफलता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने इसी की तर्ज़ पर १६ नए सेण्टर खोलने का निर्णय लिया है।

यदि आप भी घरौंदा में इसरायली खेती की तकनीक सीखना चाहते है तो इस पते पर समपर्क कर सकते हैं।


Centre of Excellence for Vegetables
An Indo-Israel Project
Address: Opposite Liberty Shoes Company, National Highway-1, Gharaunda, Haryana 132114
Phone: 01748-251621
Email: cev.karnal@gmail.com, cev.gharaunda@gmail.com
Web: http://centreofexcellenceforvegetable.webs.com