हरयाणवी चुटकुले: प्यार के झगूड

 


एक हरयाने का देसी नजदीक के शहर में दारू पी कै
फिल्म देखण चल्या गया ।
फिल्म में हीरो अर हिरोइन पेड़ के तले बैठे अर
हिरोईन हीरो त बोली- जानम मुझे तेरी आँखों में
प्यार ही प्यार नजर आता है और सारा संसार नजर
आता है ।
फिल्म ख़त्म हुयी , देख कै बहार लिकड़े त उस
डाक्की क ओर त कुछ याद रह्या ना बस याहे बात
याद रहगी ।
सांझ ने घरां पहुँच क आपने घरआली त बोल्या – कालू
की माँ सारे काम छोड़ कै एक बै उरे न आ ।
घरआली डर गी के आज त दारू पी रहा स कुछ
ना कुछ कलेश करेगा ।
वा बोली – देख डंगरा ने सम्भालन का बख्त
हो रहा स , काम कर लेन दे तेरे त पाछे बतलाऊंगी ।
वो बोल्या – ना डांगर डान्गुर पाछे छेडिये पहलम तू
उरे ने आ ।
इब वा डरती उस धोरे चाली गयी अर
बोली तावला सा बता के काम स ।
वो बोल्या – तू एक बे मेरी आंख्यां में देख क बता ,
तने कीमे दिखे स ?
वा उस की आँख्यां में देख क बोली – मने त कुछ
बी ना दिखता ।
वो बोल्या – ना तू ध्यान त देख तन्ने कुछ दिखे
गा ।
वा बोली – जले मन्ने ओर त कुछ दिखता ना बस
ढीढ अ ढीढ दीखे सँ ।
वो बोल्या – अरै बावली तेरी समझ में
ना आयी … ये ढीढ कोन्या , ये त प्यार के झगूड उठ रे
सँ ।

—मखौलिये जाट कह दे सच्ची बात !!!!!