हरियाणा आला के चुनाव, नेता, सरपंच


“कुछ तुम भी कर ल्यो”

एक बै एक गाम में कुम्हार मर-ग्या, तै सारे गाम आळे अफसोस करण लागे । कुम्हारी जोर-जोर तैं रोवै थी, गाम का सरपंच बोल्या – कुम्हारी, तू क्यूं रोवै सै?

कुम्हारी बोल्ली – कुम्हार तीन दिन पहल्यां ऐं घोड़ी ल्याया था, ईब उस-पै कूण सवारी करैगा?

सरपंच बोल्या – मैं गाम का सरपंच सूं, मैं सवारी कर ल्यूंगा ।

कुम्हारी फिर जोर-जोर तैं रोवण लागी । सरपंच बोल्या – ईब के होया ?

कुम्हारी बोल्ली – कुम्हार दस दिन पहल्यां ऐं नया रेडियो ल्याया था, ईब उसनै कूण सुणैगा ?

सरपंच बोल्या – मैं गाम का सरपंच सूं, मैं सुण ल्यूंगा ।

कुम्हारी फिर रोवण लागी । सरपंच बोल्या – ईब के होया ?

कुम्हारी बोल्ली – कुम्हार के सिर पै दस हजार रुपय्ये का कर्जा सै, उसनै कूण तारैगा ?

सरपंच बोल्या – अरै गाम आळो, सब कुछ मैं ऐं करूंगा के, कुछ तुम भी कर ल्यो !!


भूंड-फूक

एम. एल. ए. का चुनाव चल रहा था । एक नेता जो चुनाव में खड़ा था, कई ईंट भट्टों का मालिक था ।

एक गांव में गया वोट मांगने । एक ताऊ उस तैं बोल्या – “अरै पापी, तू किस मुंह तैं वोट मांगै सै ? तन्नैं चोवे ताहीं के भूंड फूक दिये !!”


इलैक्शन

एक नाई एक लीडर के बाळ काटै था अर खूब इलैक्शन की बात करै था । लीडर दुखी हो-ग्या अर बोला – “तेरै इलैक्शन की इतणी क्यूं लाग रही सै ?

नाई बोला – “अरै, मन्नैं इलैक्शन का के करणा सै ? इलैक्शन का नाम लेण तैं तेरे सिर के बाळ खड़े हो-ज्यां सैं अर मन्नैं काटण में आसानी हो ज्या सै !!


“मैं हार-ग्या तै के करूँगा ?”

रामफळ कै इलैक्शन लड़न का भूत सवार हो-ग्या । तीन कीले धरती थी, वा गहणै (गिरवी) धर दी, तीन-चार लाख रुपय्ये थे, वे भी ला दिये ।

एक दिन एक गाम में वोट मांगण गया । गाम आळे बोल्ले – रामफळ, तू जीत-ग्या तै के करैगा ?

रामफल बोल्या — मन्नैं इस बात की चिंता कोनी अक जीत-ग्या तै के करूंगा । मन्नै तै यो फिकर लाग रहया सै अक हार-ग्या तै के करूंगा !!


चीफ मिनिस्टर का दौरा

एक बै गाम मै मुख्यमंत्री नै आणा था । गाम का सरपंच बोल्या गाम आळां तैं अक गाम नै कत्ती चमका दो अर सारी नाळी साफ कर दो ।

लीलू बोल्या – के बात, चीफ मिनिस्टर के नाळियां म्हां कै घिसड़ता आवैगा ???