जीवन परिचय; ज्ञानी राम शास्त्री और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

 

 


जींद जिले के गांव अलेवा में सन् 1923 में जन्म। भिवानी और अमृतसर से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। ओरियंटल कॉलेज, लाहौर से शास्त्री की परीक्षा पास करके लायलपुर चले गए। 1946 में सांप्रदायिक दंगों के कारण गांव अलेवा में आ गए। 1949 में लुधियाना में जयहिंद कॉलेज के स्थापना की। चालीस वर्षों तक अध्यापन किया। पाकिस्तान की पोल, नया जमाना, बखत के बोल, ज्ञान के हीरे मोती, वक्त की आवाज, किसान और मजदूर, आजादी का राज नामक हरियाणवी रचनाएं प्रकाशित हैं। रचनाओं को वाशिष्ट प्रकाशन, ज्ञान भवन, अलेवा, जींद के सौजन्य से प्रकाशित किया है।


 

ज्ञानी राम शास्त्री की हरियाणवी रचनाएँ


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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