हरियाणवी कविता: खरखोदे धोरै सोनीपत मैं / रणवीर सिंह दहिया

 


खरखोदे धोरै सोनीपत मैं, बरोणा नाम सुण्या होगा।
इसे गाम का रहणे आला, मेहरसिंह नाम सुण्या होगा।।

पैदा कद सी हुया मेहरसिंह, तारीख कोण्या याद मेरै
फौज के मां भरती होग्या, बणाण गाण का शोक करै
बुराई तै रहया दूर परै, यो किस्सा आम सुण्या होगा।।
गरीब किसान का बेटा था ओ गरीबी मैं जवान हुया
पढ़ लिख थोडा ए पाया ओ भोला सा इन्सान हुया
दुनिया के मां नाम हुया सबनै पैगाम सुण्या होगा।।
घर कुण्बे नै रोक लगाई नहीं रागनी गावैगा
ऐसे कर्म करैगा तै तूं नर्क बीच मैं जावैगा
तूं म्हारी नाक कटावैगा उसपै इल्जाम सुण्या होगा।।
नहीं हौसला कदे गिराया तान्ने सुणे गया रणबीर।
दिल मैं जो भी बात खटकी वाह घड़दी सही तसबीर
सरहद उपर लिखै था वीर उसका सलाम सुण्या होगा।।


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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