हरियाणवी कविता: जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै / रणवीर सिंह दहिया

 


जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै।
भाई का भाई बैरी क्यों होग्या नहीं समझ मैं पाया रै॥

गरीब जाट के बेटा-बेटी रैहगे बिना पढ़ाई क्यों
गरीब जाट की बहू मरती आज बिना दवाई क्यों
गरीब जाट की हालत सुधरै ना बात चलाई क्यों
अमीर जाट आँख फेरगे म्हारे मैं बदबू आई क्यों
थारे स्कूल न्यारे होगे म्हारे का बुरा हाल बणाया रै॥

बीस कील्ले आळे का मन्नै छोरा बेरोजगार दिखा दे
दो कील्ले आळा मरै भूखा तू बस्या घरबार दिखा दे
बिना ब्याहा रहै म्हारा उड़ै इसा परिवार दिखा दे
गरीब किसान का बेटा यो चलाता सरकार दिखा दे
अमीर की सै जात पीस्सा म्हारै जात का ठप्पा लाया रै॥

जात के नाम पै जात्यां आळे खूब निशाने साध रहे
पूरी जात का भला चाहवैं वे माणस एकाध रहे
जात के नाम पै पेट अपना फुला बाध रहे
जात सुधार कोन्या चाहते समझ हमनै सड़ांध रहे
जात का नाम लेकै लोगां नै फायदा घणा ए ठाया रै॥

किस्मत माड़ी गरीब जाट की न्यों कहकै नै भकावैं
पाछले जन्म का भुगतैं सैं उसका फल आज पावैं
इस जन्म का मिलै अगले मैं आच्छी ढ़ाळ समझावैं
इस जन्म का ना कोए खाता रणबीर पै ये लिखावैं
सारी जात्यां के गरीबो क्यों ना कदे हिसाब लगाया रै॥


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

यदि आप कोई सुझाव या  संभंधित जानकारी साँझा करना चाहते हैं तो हमे mhaaraharyana@gmail.com पर ईमेल करें .