हरियाणवी कविता: म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया / रणवीर सिंह दहिया

 


म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया
आर्थिक उन्नति करी कम लिंग अनुपात नै खाया (टेक)

छाँट कै मारें पेट मैं लडकी समाज के नर नारी
समाज अपनी कातिल की माँ कै लावै जिम्मेदारी
जनता हुइ सै हत्यारी पुत्र लालसा नै राज जमाया।।

औरत औरत की दुश्मन यो जुमला कसूता चा लै
आदमी आदमी का दुश्मन ना यो रोजै ए घर घा लै
समाज की बुन्तर सा लै यो हरयाणा बदनाम कराया।।

वंश का पुराणी परम्परा पुत्र नै चिराग बतावें देखो
छोरा जरूरी होना चाहिए छोरियां नै मरवावें देखो
जुलम रोजाना बढ़ते जावें देखो सुन कै कांपै सै काया।।

अफरा तफरी माच रही महिला कितै महफूज नहीं
जो पेट मार तैं बचगी उनकी समाज मैं बूझ नहीं
आती हमनै सूझ नहीं, रणबीर सिंह घणा घबराया।।


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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