हरियाणवी कविता: सन ब्यालीस मैं हे फौजी नै / रणवीर सिंह दहिया

 


सन ब्यालीस मैं हे फौजी नै दई सिंघापुर मैं ललकार।।
न्यों बोल्या द्यो साथ बोस का ठाकै हाथों मैं हथियार।।

जुल्म ढाये गोरयां नै करे जारी काले फरमान आड़ै
भगतसिंह से फांसी तोड़े लूटे म्हारे अरमान आड़ै
गान्धी आगै औछे पड़गे ये ब्रिटेन के इन्सान आड़ै
म्हारे देश के बच्यां की खोसी क्यों मुसकान आड़ै
ठारा सौ सतावण मैं चाली हे उदमी राम की तलवार।।

देख जुल्म अंग्रेजां के लग्या फौजी कै झटका सुणियो
भरके नै यो फूट गया उनके पापां का मटका सुणियो
बंदरबांट देख गोरयां की होया उसके खटका सुणियो
एक बै बढ़े पाछै फर ना उसनै खाया लटका सुणियो
सन पैंतीस मैं भरती होग्या छोड़ गाम की मौज बहार।।

गुलाम देश का मतलब के न्यों पूरा गया पकड़ फौजी
देश आजाद कराना घणा जरूरी न्यों गया अकड़ फौजी
बुझी चिंगारी सुलगाके नै बाल गया यो भकड़ फौजी
देश प्रेम की बना रागनी न्यों तोड़ गया जकड़ फौजी
जाट का होके तूं गावै रागनी ना भूल्या बाबू की फटकार।।

लखमी दादा नै सांग करया गाम बरोने मैं एक रात सुणो
पदमावत के किस्से मैं दोनां की थी मुलाकात सुणो
कद का देखूं बाट घाट पै तेरे आवण की या बात सुणो
माणस आवण की बात बणाई कर तुरत खुभात सुणो
स्टेज पै बुला दादा लखमी नै रणबीर करया भूल सुधार।।


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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