हरियाणवी कविता: आपस मैं हम लड़ां लड़ाई या असल कहाणी कोन्या / हरिचन्द

 

आपस मैं हम लड़ां लड़ाई या असल कहाणी कोन्या
म्हारै उल्टी शिक्षा ला राखी ईब तक जाणी कोन्या

के तूं मेरा लेर्या सै मैं के खोसूं सुं तेरा
होरे सां कंगाल फेर भी कररे मेरी मेरा
नर्क म्हं म्हारा बसेबा होग्या सबनै पट लिया बेरा
बांस उठरी ढुंढां म्हं यू रह लिया रहन बसेरा
यौ सारी दुनियां कहै कमेरा या झूठी बाणी कोन्या

जितना काम काज दुनियां म्हं सब आपें कर रे सां
खान फैक्ट्री खेतां मैं हम कमा कमा मर रे सां
न्हाण खाण का ब्योंत रहा ना सब सांसे भर रे सां
हरदम फड़क फड़क रहै दिल म्हं इसे करड़े डर रे सां
कमा कमा किसकै धर रे सां जगह पछाणी कोन्या

समझ बढ़ी जब इन्सानों की एक वर्ग लुटेरा होग्या
लूट फूट की चाल चल्या और मालिक बडेरा होग्या
अपणी शिक्षा पढ़ा लिखा कै शेर बबेरा होग्या
उस जुल्मी के करणे तै यू दुखी कमेरा होग्या
इब तो उठ सवेरा होग्या या समों पुराणी कोन्या

दुख के तीर जगावण लागे उठ बैठे होल्यो नै
सभी कमेरे कट्ठे होकै दुख अपणा रोल्यो नै
कट्ठे होकै सारे चालो धन अपणा टोल्यो नै
हरीचन्द उस लुटण आळे दुश्मन नै खोल्यो नै
अपणे दुख धोल्यो नै मिलकै बात बराणी कोन्या


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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