हरियाणवी कविता: तेरा मेरा एक शरीर सै रे / हरिचन्द

 

तेरा मेरा एक शरीर सै रे, मां का जाया बीर सै रे
ल्या कुछ फूल धराई दे

बहण भाई का प्यार जगत म्हं, इसा और नहीं संसार जगत म्हं
फेर बड़ा व्यवहार जगत म्हं, जो चलता रहै लगातार जगत म्हं
इसी मनै रूशनाई दे, ल्या कुछ फूल धराई दे

फ्रीज वीडीयो की नहीं जरुरत, बणी रहो मनै तेरी सूरत
लदो बधो और फुलो फळियो, अगत बेल सुथरी चलियो
दुनियां तनै भलाई दे, ल्या कुछ फुल धराई दे

ना चहिए मनै हाथी घोड़ा, ना चहिए मनै चादर जोड़ा
एक काम तू कर दे मेरा, कर दे दिल का दूर अन्धेरा
बेबे नै पढ़ाई दे, ल्या कुछ फुल धराई दे

भैय्या मेरे मनै पढ़ाइए, जिन्दगी मेरी सफल बणाइए
ज्ञान के द्वार मेरे खुल ज्यागें, हरिचन्द सब सुख मिल ज्यागें
बेबे तनै बधाई दे, ल्या कुछ फुल धराई दे


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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