हरियाणवी कविता: तेरे द्वार खड़ा एक जोगी / रणवीर सिंह दहिया

 


तेरे द्वार खड़ा एक जोगी
लियो मेहर सिंह का सलाम
छोड़ चले हम देश साथियो तुम लियो मिलकै थाम
देश छोड़ चाल पड़े रै, भरे अंग्रेजां के पाप घड़े रै
जनता जागगी सारी
किसान संगठन खूब बनावैं, किते वकील सड़क पै आवैं
देश मैं उठी चिंगारी
बढ़ती जा सै फौज म्हारी, लियो मान मेरा पैगाम।।
म्हारे पाछे तै ख्याल राखियो, देश हवालै थारे साथियो
मतना तुम सो जाइयो
देश की खातर लड़ो लड़ाई, कट्ठे होकै लागे लुगाई
गीत खुशी के गाइयो
अंग्रेज नै मार भगाइयो, तज अपणा आराम।।
पाबन्दी ना लगै जाट पै, गीत सुरीले गावै ठाठ तै
बीर मरद और जवान
गीतां तै उठैगी झाल, कुर्बानी के हों न्यूं ख्याल
बणो भगतसिंह से महान
भारत मां की बणो स्यान, लियो यू समझ हमारा काम।।
बाबू नै दिया धक्का फौज में, न्यों सोचै था रहैगा मौज में
गए बदल उड़ै फेर ख्याल
मनै खून द्यो तम भाई, आजादी द्यूं थारे ताहिं
सुभाष बतागे फिलहाल
समझगे तत्काल मेहरसिंह, दियो रणबीर सर अन्जाम।।


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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