हरियाणवी कविता: लेणा एक ना देणे दो दिलदार बणे हांडै सैं / लखमीचंद

 

लेणा एक ना देणे दो दिलदार बणे हांडै सैं
मन मैं घुण्डी रहै पाप की यार बणें हांडैं सैं

नई-नई यारी लागै प्यारी दोष पाछले ढक ले
मतलब खात्यर यार बणें फेर थोड़े दिन में छिक ले
नहीं जाणते फर्ज यार का पाप पंक में पक ले
कैं तैं खाज्यां धन यार का ना बाहण बहू नै तक ले
करें बहाना यारी का इसे यार बणे हांडै सैं

मतलब कारण बड़ै पेट मैं करकै नै धिंगताणा
गर्ज लिकड़ज्या पास पकड़ज्यां करैं सारे कै बिसराणा
सारी दुनिया कहा करै, करै यार-यार नैं स्याणा
उसे हांडी मैं छेक करैं और उसे हांडी मैं खाणा
विश्वासघात करैं प्यारे तै इसे यार बणे हाण्डैं सैं

यारी हो सै प्याऊ केसी हो कोए नीर भरणियां
एक दिल तैं दो दिल करवादे करकै जबान फिरणियां
यार सुदामा का कृष्ण था टोटा दूर करणियां
महाराणा को कर्ज दिया था भामाशाह था बणियां
आज टूम धरा कै कर्जा दें साहूकार बणे हांडै सैं

प्यारे गैल्यां दगा करे का हो सब तै बद्ती घा सै
जो ले कै कर्जा तुरंत नाट्ज्या औ बिन औलादा जा सै
पढे लिखे और भाव बिना मनै छन्द का बेरा ना सै
पर गावण और बजावण का मनै बाळकपण तै चा सै
इब तेरे केसे ‘लखमीचन्द’ हजार बणे हांडैं सैं


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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