हरियाणवी कविता: सन् 47 मैं हिन्द देश का बच्चा बच्चा तंग होग्या / हरीकेश पटवारी

 

सन् 47 मैं हिन्द देश का बच्चा बच्चा तंग होग्या
राज्यों का जंग बन्द होग्या तो परजा का जंग होग्या

जिस दिन मिल्या स्वराज उसी दिन पड़गी फूट हिन्द म्हं
जितने थे बदमास पड़े बिजळी ज्यों टूट हिन्द म्हं
छुरे बम्ब पस्तौल चले कई होगे शूट हिन्द म्हं
पिटे कुटे और लूटे बड़ी माची लूटे हिन्द म्हं
एक एक नंग साहूकार हुआ एक एक सेठ नंग होग्या

कलकत्ता बम्बई कराची पूना सूरत सितारा
गढ़ गुड़गांवा रोहतक दिल्ली बन्नू टांक हजारा
हांसी जीन्द हिसार आगराअ कोटा बलख बुखारा
लुधियाणा मुलतान सिन्ध बंगाल गया सारा
भारत भूमि तेरा रक्त में गूढ़ सुरख रंग होग्या

कुछ कुछ जबर जुल्म नै सहगे कुछ कमजोर से डरगे
कुछ भय में पागल होगे कुछ खुदे खुदकशी करगे
कुछ भागे कुछ मजहब पलटगे कुछ कटगे कुछ मरगे
खाली पड़े देखल्यो जाकै लाहौर अमृतसर बरगे
जणों दान्यां नै शहर तोड़ दिए साफ इसा ढंग होग्या

ऊपर बच्चे छाळ छाळ कै नीचे करी कटारी
पूत का मांस खिला दिया मां नै इसे जुल्म हुए भारी
जलूस काढे नंगी करकै कई कई सौ नारी
एक एक पतिव्रता की इज्जत सौ सौ दफा उतारी
जुल्म सितम की खबरें पढ़ पढ़ हरिकेश दंग होग्या


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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