हरियाणवी कविता: सिंघापुर मैं फंस्या मेहरसिंह / रणवीर सिंह दहिया

 


सिंघापुर मैं फंस्या मेहरसिंह याद जाटणी आई।।
मन मैं घूमै गाम बरोना रात काटणी चाही।।

जर्मन और जापान फौज का बढ़ता आवै घेरा था
भारत के फौजी भाई अंग्रेज फौज का डेरा था
सिंघापुर काट्या दुनिया तै पुल काट कै गेरया था
अंग्रेजी सेना भाज लई थी पीला पड़ग्या चेहरा था
सुणा रागनी फौजी नै या फौज डाटणी चाही।।

साथ रहणिये संग के साथी उसनै यो पैगाम दिया
सिंघापुर मैं फौजी जितने सबका दिल फेर थाम दिया
म्हारे साथ क्यों ऐसी बनरी अन्दाजा लगा तमाम दिया
प्रेम कौर की याद सतावै ना फेर बी जिगर मुलाम किया
चिन्ता आई जो दिल मैं तत्काल बांटणी चाही।।

पड़े पड़े कै याद आया प्रेम कौर का वो फाग भाई
मक्की की रोटी गेल्यां बणाया सिरसम का उनै साग भाई
साहमी बैठ परोसी थाली बोल्या मुंडेरे पै काग भाई
कुछ दिन पाछै भरती होग्या खींच लेग्या यो भाग भाई
फिरया फिरंगी वायदा करकै झूठ चाटणी चाही।।

तीजां का त्यौहार सतावै ओ जामण उपर झूल्या
गाम को गोरा दिख्या उसनै नहीं खेतां नै भूल्या
प्रेम कौर की चिट्ठी आई ना गात समाया फूल्या
रणबीर सिंह नै मेहर सिंह का हाल लिख्या सै खुल्या
बणा रागनी फौजी की सब बात छांटणी चाही।।


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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