हरियाणवी कविता: हो-ग्या इंजन फेल चालण तैं, घंटे बंद, घडी रह-गी / लखमीचंद

 

हो-ग्या इंजन फेल चालण तैं, घंटे बंद, घडी रह-गी।
छोड़ ड्राइवर चल्या गया, टेशन पै रेल खड़ी रह-गी॥टेक॥

भर टी-टी का भेष रेल में बैठ वे कुफिया काल गये –
बंद हो-गी रफ्तार चलण तैं, पुर्जे सारे हाल गये।
पांच ठगां नै गोझ काट ली, डूब-डूब धन-माल गये –
बानवें करोड़ मुसाफिर थे, वे अपना सफर संभाल गये॥1॥

ऊठ-ऊठ कै चले गए, सब खाली सीट पड़ी रह-गी।
छोड़ ड्राइवर चल्या गया, टेशन पै रेल खड़ी रह-गी॥

टी-टी, गार्ड और ड्राइवर अपनी ड्यूटी त्याग गए –
जळ-ग्या सारा तेल खतम हो, कोयला पाणी आग गए।
पंखा फिरणा बंद हो-ग्या, बुझ लट्टू गैस चिराग गए –
पच्चीस पंच रेल मैं ढूंढण एक नै एक लाग गए॥2॥

वे भी डर तैं भाग गए, कोए झांखी खुली भिड़ी रह-गी।
छोड़ ड्राइवर चल्या गया, टेशन पै रेल खड़ी रह-गी॥

कल-पुर्जे सब जाम हुए भई, टूटी कै कोए बूटी ना –
बहत्तर गाडी खड़ी लाइन मैं, कील-कुहाड़ी टूटी ना।
तीन-सौ-साठ लाकडी लागी, अलग हुई कोई फूटी ना –
एक शख्स बिन रेल तेरी की, पाई तक भी ऊठी ना॥3॥

एक चीज तेरी टूटी ना, सब ठौड़-की-ठौड़ जुड़ी रह-गी।
छोड़ ड्राइवर चल्या गया, टेशन पै रेल खड़ी रह-गी॥

भरी पाप की रेल अड़ी तेरी पर्वत पहाड़ पाळ आगै –
धर्म-लाइन गई टूट तेरी नदिया नहर खाळ आगै।
चमन चिमनी का लैंप बुझ-ग्या आंधी हवा बाळ आगै –
किन्डम हो गई रेल तेरी जंक्शन जगत जाळ आगै॥4॥

कहै लखमीचंद काळ आगै बता किसकी आण अड़ी रहैगी ?
छोड़ ड्राइवर चल्या गया, टेशन पै रेल खड़ी रह-गी॥


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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