हरियाणवी कविता: हो पिया भीड़ पड़ी मैं / लखमीचंद

 

हो पिया भीड़ पड़ी मैं नार मर्द की खास दवाई हो,
मेल मैं टोटा के हो सै

टोटे नफे आंवते जाते, सदा नहीं एकसार कर्मफल पाते
उननै ना चाहते सिंगार जिनके, गात समाई हो,
मर्द का खोटा के हो सै

परण पै धड़ चाहिए ना सिर चाहिए, ऊत नै तै घर चाहिए ना जर चाहिए
बीर नै तै बर चाहिए होशियार, मेरी नणदी के भाई हो
अकलमंद छोटा के हो सै

पतिव्रता बीच स्वर्ग झुलादे, दुख बिपता की फांस खुलादे
भुलादे दरी दुत्तई पिलंग निवार, तकिया सोड़ रजाई हो
किनारी घोटा के हो सै

लखमीचन्द कहै मेरे रुख की, सजन वैं हों सैं लुगाई टुक की
जो दुख सुख की दो च्यार, पति नै ना हंस बतलाई हों
तै महरम लोटा के हो सै


रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं।

हरियाणवी रागनियाँ

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