हरियाणवी रागनियाँ

हरियाणवी साहित्य लिपिबद्ध न होने के कारण नगण्य ही माना जाता है लेकिन हरियाणवी लोक-साहित्य बहुत समृद्ध है। हरियाणवी लोक साहित्य में हरियाणवी किस्से कहानी लोक कथाओं का विशेष महत्व है। लोक-कथाएं प्राचीन काल से प्रचलित हैं और आज भी देहात में चौपालों पर, सामान्य बातचीत में इनका समावेश सहज ही पाया जा सकता है।

18वीं तथा 19वीं शताब्दी में साँग कला हरियाणवी भाषी क्षेत्रों में लोकरंजन का सर्वप्रमुख माध्यम थी। हरियाणा की मिटटी आज भी अपने इतिहास को चल प्रचिलित रागनिओ द्वारा संजोकर रखे हुए है. शताब्दियों के गाये गीतों का अर्क है रागिनी, तो चलिये हम भी जुड़ जाये इस हरियाणा के इतिहास से



सूर्य कवि पंडित लखमीचंद और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

रणवीर सिंह दहिया और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

ज्ञानी राम शास्त्री और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

हरीकेश पटवारी और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

हरिचन्द और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

*

*

*

*

*

*

*

*

*

*

*

*

*

*

Author

achoudhary15@gmail.com
अखिल चौधरी म्हारा हरियाणा पोर्टल के प्रमुख लेखक है। वे हरयाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। उनका उद्देश्य इस पोर्टल द्वारा हरयाणा की समय समायिक जानकारी के अलावा हरियाणा की भाषा, संस्कृति अवं लोक व्यव्हार को इंटरनेट के जरिये विश्व पटल पर लाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *