हरियाणा की पहली महिला पायलट बनी प्रियंका

 

‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है’. ऐसा ही कुछ कर दिखाया फतेहाबाद के छोटे से गांव सूलीखेड़ा के छोटे से किसान की प्रियंका ने. बचपन में हवाइ जहाज को उड़ता देख उसे उड़ाने की बात करने वाली प्रियंका की बातों को अक्सर उसके सहपाठी और परिजन हंसी उड़ा दिया करते थे, लेकिन प्रियंका ने उसे न केवल अपना लक्ष्य बनाया बल्कि पूरा भी कर दिखाया, आज प्रियंका आसमान में हवाई जहाज उड़ा रही है.

प्रियंका की इस उपलब्धि का पता चलते ही उसके गांव में हर्ष की लहर दौड़ गई, प्रियंका के परिजन उसके सहपाठियों के साथ-साथ पूरे गांव में हर्ष का माहौल है.

प्रियंका के पिता सूरजमल ने बताया कि वर्ष 2006 में कड़ी मेहनत कर अपने बचपन के सपने को पूरा करने के दिशा में पहला कदम रखा. प्रियंका ने वर्ष 2007 में 10 जमा 2 की परीक्षा उत्तीर्ण की और इन्डियन एविएशन बोर्ड के एग्जाम में देहली फलाईंग क्लब से अपने सपने को साकार करने की शुरूआत की उसके बाद डब्ल्यूसीसी एक्सेल एयर एविएशन फलाईंग स्कूल, फिलिपिन्स से अपना प्रशिक्षण पूर्ण किया. फिलिपिन्स से अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रियंका ने सात चरणों की कठिन परीक्षा और प्रेक्टिकल व साक्षात्कार को बखूबी उत्तीर्ण करते हुए इंडिगो एअरलाइंस में बतौर पायलट नियुक्ति हासिल की है. इस नियुक्ति पर उनके परिवार के सदस्यों में खुशी का माहौल है.

वहीं प्रियंका ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और अपनी मेहनत और लगन को दिया है. प्रियंका के पति सुर्य प्रताप सिंह चहल बॉर्डर सिकोरिटी फोर्स में डिप्टी कमांडेंट के पद पर हैं तथा वर्तमान में फिरोजपुर पंजाब में तैनात हैं. प्रियंका अब अपने गांव के साथ—साथ सभी उन लड़कियों के लिए आज प्रेरणा बन चुकी है, जो सपने देखती है और कुछ बनना चाहती है. प्रियंका लड़कियों से कहती है कि सपने देखो और उसे पूरा करने के लिए दिन—रात एक कर दो, मंजिल अवश्य मिलेगी.


ये खबर News18 के सौजन्य से प्रस्तुत है।