हरियाणवी कविता: मेहरसिंह नै ललकार दई थी / रणवीर सिंह दहिया

  मेहरसिंह नै ललकार दई थी, करकै सोच बिचार दई थी। एक नहीं सौ बार दई थी, जंजीर गुलामी की तोड़ दियो।। न्यूं बोलो सब कट्ठै होकै भारत माता जिन्दाबाद गाम बरोना देश हमारा गोरयां नै कर दिया बरबाद फिरंगी सैं धणे […]

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हरियाणवी कविता: तेरे द्वार खड़ा एक जोगी / रणवीर सिंह दहिया

  तेरे द्वार खड़ा एक जोगी लियो मेहर सिंह का सलाम छोड़ चले हम देश साथियो तुम लियो मिलकै थाम देश छोड़ चाल पड़े रै, भरे अंग्रेजां के पाप घड़े रै जनता जागगी सारी किसान संगठन खूब बनावैं, किते वकील सड़क पै […]

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हरियाणवी कविता: आस बंधी अक भोर होवैगी / रणवीर सिंह दहिया

  आस बंधी अक भोर होवैगी षोशण जारी रहै नहीं ।। लोक राज तैं राज चलैगा रिष्वत बीमारी रहै नहीं ।। रिष्वतखोर मुनाफाचोर की स्वर्ण तिजूरी नहीं रहै चेहरा सूखा मरता भूखा इसी मजबूरी नहीं रहै गरीब कमावै उतना पावै बेगार हजूरी […]

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हरियाणवी कविता: सन ब्यालीस मैं हे फौजी नै / रणवीर सिंह दहिया

  सन ब्यालीस मैं हे फौजी नै दई सिंघापुर मैं ललकार।। न्यों बोल्या द्यो साथ बोस का ठाकै हाथों मैं हथियार।। जुल्म ढाये गोरयां नै करे जारी काले फरमान आड़ै भगतसिंह से फांसी तोड़े लूटे म्हारे अरमान आड़ै गान्धी आगै औछे पड़गे […]

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हरियाणवी कविता: जाल तोड़कै नै लिकड़ गया / रणवीर सिंह दहिया

  जाल तोड़कै नै लिकड़ गया होग्या तूं आजाद पिया।। साथ रहनियां संग के साथी करै हरियाणा याद पिया।। जालिम और गुण्डे जनता नै नोच नोच कै खावैं रिश्वतखोरी बाधू होरी ये कति नहीं शरमावैं धनवानां की करैं चाकरी कमेरयां नै धमकावैं […]

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हरियाणवी कविता: रेगुलर नौकरी पाना कोन्या कति आसान बताऊँ मैं / रणवीर सिंह दहिया

  रेगुलर नौकरी पाना कोन्या कति आसान बताऊँ मैं।। सी ऍम ऍम पी सब धोरै पाँच साल तैं धक्के खाऊँ मैं।। (टेक) पहलम कहवैं थे टेस्ट पास करे पाछै तूं बताईये पास करे पाछै बोले पहले चालीस गये बुलाईये एक विजिट चार […]

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हरियाणवी कविता: म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया / रणवीर सिंह दहिया

  म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया आर्थिक उन्नति करी कम लिंग अनुपात नै खाया (टेक) छाँट कै मारें पेट मैं लडकी समाज के नर नारी समाज अपनी कातिल की माँ कै लावै जिम्मेदारी जनता हुइ सै हत्यारी पुत्र […]

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हरियाणवी कविता: साम्राज्यवाद के निशाने पै युवा लड़के और लड़की / रणवीर सिंह दहिया

  साम्राज्यवाद के निशाने पै युवा लड़के और लड़की बेरोजगारी हिंसा और नशा घंटी खतरे की खडकी (टेक) सही बातों तैं धयान हटा कै नशे का मंतर पकडाया लड़की फिरती मारी मारी समाज यो पूरा भरमाया ब्यूटी कंपीटीसन कराकै देई लवा ऐश […]

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हरियाणवी कविता: किसे और की कहाणी कोन्या इसमैं राजा रानी कोन्या / रणवीर सिंह दहिया

  किसे और की कहाणी कोन्या इसमैं राजा रानी कोन्या सै अपनी बात बिराणी कोन्या, थोड़ा दिल नै थाम लियो।। यारी घोड़े घास की भाई, नहीं चलै दुनिया कहती आई मैं बाऊं और बोऊं खेत मैं, बाळक रुळते मेरे रेत मैं भरतो […]

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हरियाणवी कविता: जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै / रणवीर सिंह दहिया

  जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै। भाई का भाई बैरी क्यों होग्या नहीं समझ मैं पाया रै॥ गरीब जाट के बेटा-बेटी रैहगे बिना पढ़ाई क्यों गरीब जाट की बहू मरती आज बिना दवाई क्यों गरीब जाट की […]

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