जीवन परिचय; योगेश्वर दत्त; आखिर क्या बात थी कि मात्र 8 साल का बच्चा सबकुछ छोड़कर पहलवानी में कूद पड़ा

यदि यूं कहें कि हरियाणा में पहलवानों का खजाना है, तो गलत नहीं होगा। सुशील कुमार, नरसिंघ यादव, गीता फोगट, साक्षी मलिक ऐसे नाम है, जो हरियाणा के ही नहीं, बल्कि भारत के भी शान है। पर इन नामों में योगेश्वर दत्त को भुलाया नहीं जा सकता, जिन्होंने अपने सपनों का सफर हरियाणा के एक छोटे से गाँव से की थी, लेकिन आज वो अपने अदम्य साहस और उत्क्रष्ट खेल शैली से भारत का नाम ना केवल एशिया में ही ऊंचा किया, बल्कि विश्व पटल पर भी किया।

 

 
व्यक्तिगत जानकारी
उपनाम योगी, पहलवान जी
जन्म 2 नवम्बर 1982 (आयु 34)
भैंसवाल कलाँ, गोहाना, जिला सोनीपत, हरियाणा
निवास हरियाणा
ऊंचाई 5 फीट 7 इंच (1.70 मी.)
माता एवं पिता का नाम सुशीला देवी (शिक्षक)

राममेहर (शिक्षक)

योगेश्वर दत्त का जन्म 2 नवंबर 1982 हरियाणा के सोनीपत में हुआ था। योगी बहुत ही शिक्षित परिवार से सम्बन्ध रखते हैं. उनकी माता अवं पिता दोनों ही शिक्षक के रूप में कार्यत हैं. यहाँ तक के उनके दादा जी भी शिक्षक थे. परिवार की ीचा थी की योगेश्वर भी पढ़ लिख कर उनके नक़्शे कदम पर चले पर किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही चुना था. उनके गाँव का माहौल खेलों वाला था, खासकर पहलवानी का। उनके गाँव में बलराज नाम का पहलवान बड़ा मशहूर था, जिससे योगेश्वर 8 साल की उम्र में इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पहलवानी सीखने की ठान ली। पहली बार सन १९९२ में जब योगी केवल पांचवी कक्षा में पढ़ रहे थे तब उन्होंने स्कूल स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता जीती। यहीं से योगी के परिवार ने उनके कुश्ती के प्रति रुझान को समझा और उन्हें पूरा पूरा प्रोत्साहन दिया। फिर उन्होंने पीछे मुद के नहीं देखा। चाहे वो १९९४ में पोलैंड में हुए इंटरनेशनल स्कूल कैडेट खेल प्रतियोगिता हो या फिर अस पास हो रहे दंगल उन्होंने अपनी म्हणत और कुश्ती के प्रति लगन से अपना नाम स्वयं बनाया।

सन १९९६ में वे अपनी पढाई पूरी कर दिल्ली के छतरसाल स्टेडियम में स्थानांतरित हो गए और अपना पूरा वक्त कुश्ती को समर्पित करने लगे।इसके बाद कई लोकल व् राष्ट्रीय स्तर पर पर पहलवानी प्रतिस्पर्धा जीतने के बाद 1999 के World Championship में गोल्ड जीतकर पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी को पेश किया।

2003

योगेश्वर दत्त ने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत २००३ में आयोजित लंदन commonwealth खेलों से की जहाँ उन्होंने ५५ किलोग्राम फ्रीस्टाइल कटोगरी में स्वर्ण पदक जीतकर वह वही बटोरी। वे सन २००४ में भी एथेंस ओलंपिक्स कुश्ती टीम का हिस्सा रहे जहा ५५ किलो भर वर्ग में उन्हें १८ वे स्थान से संतोष करना पड़ा।

2006 Asian Games

२००६ के १५ वे एशियाई खेलों में केवल ९ दिन का समय शेष था योगी के पिता का देहांत हो गया। परिवार के काफी मानाने के बाद ही ये झुझारू पहलवान खेलों में शिरकत करने को तैयार हुआ। पर शया योगी के लिए और भी परीक्षाएं बाकि थी। उन्हें न केवल मानसिक परन्तु घुटने की शारीरिक चोट ने भी काफी परेशां किया। पर हरयाण की मिटटी में पीला बढे इस पहलवान ने सब दर्द भुला कर ६० किलोग्राम भर वर्ग में भारत को कांस्य पदक हासिल कराया।

2008 Summer Olympics

यह योगेश्वर का दूसराओलंपिक था। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 2008 में दक्षिण कोरिया के जेजू सिटी में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर ओलंपिक के लिए अपना स्थान अर्जित किया। हालांकि ओलंपिक्स में उनका प्रदर्शन सामान्य ही रहा व् उनको ९ वे स्थान से संतोष होना पड़ा।

2010 Commonwealth Games

2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में, योगेश्वर ने 60 किलोग्राम वर्ग में चोट से लड़ते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक अर्जित किया। योगेश्वर ने ये स्वर्णिम  फाइनल तक का सफर विश्व के जाने मने पहलवान ऑस्ट्रेलियाई मूल के  फ़ारजाद ताराश (16-0, 17-0), दक्षिण अफ्रीकी मारियस लूट्स (7-1) और इंग्लैंड के साशा माडियार्किक (4-4, 8-0)  को अपने कुशल प्रदर्शन से पटकनी देते हुए पूरा किआ ।

2012 Summer Olympics

योगेश्वर ने २०१२ ओलंपिक्स के लिए कज़ाखिस्तान में हुए क़्वालिफिएर मुकाबले में सिल्वर मैडल जित कर अपनी जगह पक्की की।

इसके पश्चात लंदन में आयोजित 30 वीं ओलंपिक खेलों में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 60 किग्रा श्रेणी में एक यादगार प्रदर्शन करते हुए योगी ने भारत को कांस्य पदक दिलाया।  इस प्रकार सन १९५१ में के डी जाधव व् २०१२ में सुशिल कुमार के बाद योगी ओलंपिक्स खेलो में पदक लेन वाले तीसरे पहलवान बने। उनका आखरी शानो में पैर पकड़ने वाला दांव आज भी शायद ही कोई भारतीय भुला होगा वार्ना नीचे दिए हुए वीडियो से यादें ताजा कर ली जिए।

२०१२ में भारत सरकार द्वारा इन्हें राजीव गाँधी खेल रत्न का सम्मान दिया गया।

2014

सन २०१४ में ग्लासगो में आयोजित कोम्मोंवेल्थ कुश्ती प्रतियोगिता के ६० किलोgram भर वर्ग में योगेश्वर ने भारत का प्रतिनिध्त्वि किया और आशा के अनुरूप स्वर्ण पदक अर्जित करके देश का गौरव बढ़ाया। इसी साल हुए एशियाई खेलों में भी अपना दबदबा कायम रखते हुए ६५ किलो भर वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किआ।

सन २०१६ में हुए रिओ ओलंपिक्स में योगी जगह बनाने में जरूर सफल हुए पर उनका प्रदर्शन साधारण रहा।

सन २०१५ में शुरू हुए प्रो कुश्ती लगे के पहले संस्करण में योगेश्वर हरयाणा हम्मेर्स की टीम के कप्तान बने व् हर साल इसमें शिरकत कर रहे हैं। 33 साल के योगेश्‍वर अपने आप को राष्‍ट्रवादी मानते हैं। योगेश्‍वर के दोस्‍त बताते हैं वे अपने स्‍पष्‍टवादी हैं और कभी अपने मत केा छुपाते नहीं हैं। जेएनयू मामले के दौरान किए गए उनके ट्वीट ने काफी सुर्खियां बटोरी थी। इसके बाद जब सलमान खान को रियो ओलंपिक के लिए गुडविल एंबेसेडर बनाया गया तब भी योगेश्‍वर ने ट्वीट कर इस बात पर निशाना साधा था। नरसिंह यादव और सुशील कुमार के बीच रियो जाने को लेकर हुए तक विवाद में भी उन्‍होंने नरसिं‍ह की पैरवी की थी।

भारतीय कुश्ती चैंपियन योगेश्वर दत्त ने हाल ही में अपने जीवन में एक नया चरण शुरू किया। 33 वर्षीय ओलंपियन ने 16 जनवरी, 2017 को शीतल से शादी की। योगी ने एक बार फिर भारतीय युवाओं को सही दिशा दिखते हुए शादी में दहेज़ लेने से इंकार किया व् वधु पक्ष से शगुन के रूप में सिर्फ एक रुपया ही स्वीकार किया। उनकी धरम पत्नी शीतल शर्मा हरयाणा में कांग्रेस के नेता श्री जयभगवान शर्मा की सुपुत्री हैं।


भारत का राष्ट्रीय अवं अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके इस खिलाडी ने न केवल हरयाणा का बल्कि पुरे देश का नाम रोशन किआ है। योगेश्वर आज भी मिटटी से जुड़े हैं व् चकचोँद से दूर अपना पूरा समय कुश्ती को देते हैं। इंडिया वौइस् के सौजन्य से निचे दिया हुआ उनका ये इंटरव्यू आपको उनके सीधे व् साधारण जीवन कुश्ती के प्रति उनकी लगन व् मेहनत तथा उनके जेवण के कुछ अनछुए पहलुओं से रूबरू कराएगा।


 

म्हारा हरियाणा – हरियाणवी संस्कृति साहित्य व भाषा को समर्पित एक प्रयास

 

क्या आप ऐसी भूमि की कल्पना कर सकते हैं जहां परिवार के धन का निर्धारण इस बात से होता है की परिवार में गायों की संख्या कितनी है! जहां हर सुबह सूरज हरी धान के खेतों पर अपनी किरणों का रंग बिखेरता है और शाम के रंगीन क्षितिज एक अपनी ही तरह की बोली में अनोखी और निर्दोष सौहार्द के गीत गुनगुनाते है।

हुक्के, खाट, पीपल, बरगद, कुए, दामण ……. जी हां, यही है हमारा हरियाणा ।

हालांकि सब कहते हैं कि हरियाणा हमारे देश की “ग्रीन बेल्ट” है, लेकिन हमने यह साबित कर दिया है कि हरियाणा सिर्फ़ देश  का “अन्नदाता” हि नहीं बल्कि औद्योगीकरण के लिए भी एक केंद्रीय बिन्दु बन के उभर रहा है

जहां वेदो का निर्माण हुआ, मिथकों और किंवदंतियों के साथ भरा हुआ, हरियाणा का 5000 साल पुरना इतिहास बहुत समृद्ध है। कुरुक्षेत्र युं तो एक साधारण क्षेत्रीय शहर की तरह दिख सकता है, लेकिन वास्तव में हिंदू शिक्षाओं के अनुसार यहि से ब्रह्मांड का उद्गम हुआ और यहि बुराई पर अच्छाई की विजय हुई। ब्रह्मा ने यहि मनुष्य और ब्रह्माण्ड का निर्माण किया और भगवान कृष्ण ने भगवद गीता का धर्मोपदेश दिया। इस्सी मिट्टी पर संत वेद व्यास ने संस्कृत में महाभारत लिखा। महाभारत युद्ध से भी पहले, सरस्वती घाटी में कुरुक्षेत्र क्षेत्र में दस राजाओं की लड़ाई हुई थी। लेकिन लगभग 900 ईसा पूर्व में, यह महाभारत का ही युद्ध था, जिसने इस क्षेत्र को दुनिया भर में प्रसिद्धि दिलाई। महाभारत ने हरियाणा को बहुधनीयका, भरपूर अनाज और बहुधना की भूमि, विशाल धन की भूमि का पता लगाया। “उत्तर भारत का गेटवे” की तरह खड़े हरियाणा कई युद्धों का साक्षी रहा है। पानीपत की तीन प्रसिद्ध लड़ाईएं हरियाणा के आधुनिक पानीपत शहर के पास हुईं।

हमारे यहां के लोग दुनिया में सबसे जुदा है ….. हम जो करते है खुल के करते हैं हमारा ये अपनापन ही तो है जो लोगो को हमारे पास खींच लता हैं … और हाँ भोजन को कैसे भूल सकता है कोई ?? 🙂 हम खाने के लिए जीते हैं मखण, दूध, खोया, मलाई, चूरमा, लाडू, गुड़, कढ़ी, बथुए का रायता, बाजरे की रोटी ..? “जित दूध दही का खाना इस्सा म्हारा हरयाणा” ….. इसे तो आपने सौ बार सुना होगा। यह वह भूमि है जहां आज भी खेतों में जाने वाले किसान अपने साथ रोटी और प्याज़ ले जाते हैं, जहां नाश्ते में लस्सी के बिना दिन अधूरा है और रात में लोगों को गर्म दूध के गिलास के बिना नींद नहीं आये। हमारे यहाँ हर क्षेत्र में अदालत और पुलिस स्टेशन जरूर है, लेकिन आज भी  हमारा विश्वास पंच-परमेश्वर और पारंपरिक पंचायती राज में ज्यादा हैं, वो कहते हैं न जब आपसी विचार-विमर्श और वार्ता से विवाद सुलझ जाये तो कोर्ट कचेरी के चक्कर कौन काटे। यद्यपि आधुनिक युग ने हरयाणा में भी बहुत कुछ बदला है , लेकिन आज भी हमारे यहाँ  विशेष रूप से गांवों में, हम चाचा-चाची, ताउ-ताई, दादा-दादी, भाई-भाभी ……. एक ही छत के नीचे, संयुक्त परिवार रहते मिल जायेंगे। आज भी हम अपने माता-पिता के परामर्श के बिना, चाहे छोटा हो या बड़ा , निर्णय नहीं लेते। हालांकि हमने आधुनिकीकृत दृष्टिकोण को अपनाया है, लेकिन आज भी हम पहले अपने बड़ों का सत्कार पहले और अपना खाना बाद में ग्रहण करते हैं।

हाँ हम अभी भी पुरानी और  पारम्परिक प्रथाओं को मान्यता देते हैं व् उनका नियमित पालन करते हैं चाहे वो हल हो या कुआँ ……। हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का इतिहास वैदिक काल तक जाता है। राज्य के लोकगीत जिसे रागनी के नाम से भी जाना जाता है बहुत ही प्रसिद्ध है व् हरयाणा के इतिहास को संजोये हुए अनेक किस्से व् कहानिओं को संजोती है। हमारे हरियाणा के लोगों की अपनी परंपराएं हैं।ध्यान, योग और वैदिक मंत्र का जाप जैसी पुरानी परंपराएं आज भी लोगों  द्वारा निभाई व् मनाई जाती है। प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी रामदेव हरियाणा के ही महेंद्रगढ़ से हैं। होली, दीवाली, तीज, मकर सक्रांति, राखी, दशहरा …….या फिर सावण का झूला त्यौहार हमारी परंपरा का एक अटूट हिस्सा है … .मेहन्दी हमारे लगभग सभी त्योहारों का एक अभिन्न हिस्सा है। हमारी संस्कृति और कला नाटक, किस्से, कहानी और गीतों के माध्यम से व्यक्त की जाती है जिसे गाँवों की आम भाषा में सांग बुलाते हैं। हमारे यहां लोग गहनों के बहुत शौकीन हैं। गहनों में आमतौर पर सोने और चांदी से बने होते हैं मुख्य वस्तुओं में हार, चांदी से बने हंसली (भारी चूड़ी), झलरा (सोने के मोहर या चांदी के रुपए की बनी लम्बी तगड़ी) करणफुल और सोने की बुजनी और पैरों में करि, पाती और छैल कड़ा पहनते हैं।

हमारी सबसे प्रमुख विशेषता तो हमारी भाषा ही है है या यूँ कहें, जिस तरीके और लहजे से यहाँ बात की जाती हैं वो ही तो अलग बनता है हमे।बंगारु हमारे यहाँ बोली जाने वाली सबसे लोकप्रिय बोली है जिसे आमतौर से हरियाणवी के नाम से जाना जाता है, हमारी बोली संभवतः बाहर के लोगों को ठेठ व उग्र प्रतीत हो, लेकिन इसमें ग्रामीण मिटटी की महक से भरपूर व्यंगात्मक सरलता और सीधापन भरा है। आप क्या बोलेंगे हमारे बारे में जो ऊपर से कठोर, बोली से उग्र लेकिन; दिल इतना साफ़ और मक्खन सा नरम? और इस भाईचारे के मक्खन का आनंद लेने के लिए, आपको हरियाणा आने की जरूरत नहीं है बस किसी रस्ते चलते हरयाणवी से दो बातें कर के देख लीजिये।

हरियाणा ने तेजी से आधुनिकता को अपनाया है;  आज, रिकार्ड समय के भीतर हरियाणा ने अपने सभी गांवों को बिजली, सड़कों और पीने योग्य पानी से जोड़ा है। आज हम भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है, जो हमारे परिश्रम से ही नहीं बल्कि हमारी मिटटी हमारे पूर्वजों के के आशीर्वाद से फलित हो पाया है।

इसमें कोई संदेह नहीं है, यहां कर्म और अनुभव की अपार संभावनाए हैं और रहेंगी , जिन से जोड़ने का प्रयास हम सदैव करते रहेंगे …..

हमारा प्रयास है कि हम उच्च स्तरीय साहित्य व लेखन को बढावा दें व लुप्त होती हुई हरियाणवी विधाओं को जीवित रख सकें।


म्हारा हरियाणा कर्म में विश्वास रखता है और फल की इच्छा किए बिना, अपने नन्हें कदमों से लम्बे रास्ते पर निरंतर आगे बढ रहा है। यदि हरियाणवी भाषा के विकास में हम किंचित भी कुछ कर पाए तो अपने प्रयास को सफल समझेंगे।

आपके रचना सहयोग का स्वागत है। आप अपने सुझाव हमें mhaaraharyana@gmail.com पर ईमेल द्वारा भेज सकते हैं 


क्या आप जानते हैं हरियाणा में है विश्व का सबसे बड़ा हुक्का

तो दोस्तों आज आपको हम बताते हैं हरयाणा के सबसे बड़े हुक्का के बारे में; ये हुक्का कुरूक्षेत्र विश्वविद्याल को साल 2005 में यह हुक्का दान में मिला था। हरियाणा के जिला सोनीपत, गांव गोहाना निवासी 65 वर्षीय सावित्री मलिक ने इस हुक्के को दान में विश्वविद्याल को दिया था। लोग बताते हैं की कि इस हुक्के को सावित्री मलिक ने अपने मायके से अपनी ससुर के लिए लाया था। साल 2005 से विश्वविद्यालय में इस हुक्के को संभाल कर रखा गया है। कुरुक्षेत्र में आने वाले पर्यटक इस हुक्के को देखना नहीं भूलते। लगभग सौ साल पुराने इस हुक्के की और कई खासियत है। बताया गया कि इसमें 1 किलो तंबाकू यानि पात एक ही बार में डाला जाता है। साथ ही इसमें एक बार में 32 लीटर पानी डाला जाता। इसमें एक साथ 2 लोग हुक्का पी सकते हैं। हुक्के पाईप चारों तरफ राउंड हो सकती है।
यहाँ तक की पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह और पूर्व डिप्टी पीएम देवीलाल जैसी शख्सियतें इसमें कश लगा चुके हैं। खापों की पंचायतें हों या बड़ी राजनीतिक रैलियां, एक लंबे वक्त तक ये हुक्का भी उसमें पहुंचता रहा है।
खाप पंचायतो के कई फैसलों का गवाह बना यह हुक्का
1979 में चौधरी चरण सिंह जब पीएम बने तो दिल्ली में हुई विजयी रैली में देशभर से किसान पहुंचे थे। इन किसानों के बीच यह हुक्का रखा गया था, जिसे स्वयं चरण सिंह ने पिया था। ठीक इसी तरह हरियाणा के किसानों की दूसरी विजयी रैली 1990 में देवीलाल के डिप्टी पीएम बनने पर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुई थी। उस वक्त भी ये हुक्का वहां था। यही नहीं दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में जब-जब खापों की बड़ी पंचायतें हुईं हैं, यह हुक्का वहां फैसलों का गवाह बना।

बस बहुत हो गई; यही समय है चीन को उत्तर देने का

 


चीन ने जिस तरह चुंबी घाटी स्थित डोकलम में जबरन प्रवेश कर सड़क बनाने की कोशिश की वह सीधे-सीधे किसी की भूमि हड़पने वाली घटना थी.

यह क्षेत्र भूटान का है और उसके साथ हमारा सुरक्षा समझौता है. इसलिए उसके पक्ष में खड़ा होना और उसके भूभाग की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत का दायित्व है. इसके विरुद्ध चीनी सैनिकों ने न केवल हमारे क्षेत्र में प्रवेश किया, बल्कि दो बंकर भी तोड़ डाले थे. भारतीय सैनिकों के साथ चीनी सैनिकों की हाथापाई का वीडियो हमारे सामने है. चीन यही तक नहीं रुका.

उसने कैलाश मानसरोवर की नाथू ला दर्रे से होने वाली यात्रा तक रोक दी. चीनी सरकार के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ में भारत को धमकी भरे अंदाज में कहा गया कि ताकत के मामले में चीन उससे भारी है, इसलिए भारत भिड़ने की कोशिश न करे. ऐसे आक्रामक बयान एवं धमकी का अभिप्राय क्या हो सकता है?

दोस्तों यही समय है चीन को उत्तर देने का, हमें चीनी मोबाइलों का उपयोग बंद करना करना होगा. आपको यह पता करने की आवश्यकता है कि कोन सी मोबाइल कंपनी किस देश से ह


 

➡ माइक्रोमैक्स एक भारतीय कंपनी है।

➡ आईबीएल एक भारतीय कंपनी है।

➡ एचसीएल एक भारतीय कंपनी है।
➡ इंटेक्स एक भारतीय कंपनी है
➡ कार्बन एक भारतीय कंपनी है
➡ लावा एक भारतीय कंपनी है
➡ वर्जिन एक भारतीय कंपनी है
➡ वीडियोकॉन एक भारतीय कंपनी है
➡ XOLO एक भारतीय कंपनी है
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➡ लेनोवो चीनी कंपनी है
➡ आसुस एक चीनी कंपनी है
➡ कूलपैड एक चीनी कंपनी है
➡ गीनी एक चीनी कंपनी है
➡ हूवेई एक चीनी कंपनी है
➡ विवो एक चीनी कंपनी है
➡ OPPO एक चीनी कंपनी है
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➡ एसर एक ताइवानी कंपनी है
➡ एचटीसी एक ताइवानी कंपनी है
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➡ डेल एक अमेरिकी कंपनी है
➡ एपल एक अमेरिकी कंपनी है
➡ एचपी एक अमेरिकी कंपनी है
➡ मोटोरोला एक अमेरिकी कंपनी है
➡ माइक्रोसॉफ्ट एक अमेरिकी कंपनी है
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➡ ब्लैकबेरी एक कनाडा की कंपनी है
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➡ सोनी एक जापानी कंपनी है
➡ तोशिबा एक जापानी कंपनी है।
➡ पैनासोनिक एक जापानी कंपनी है
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फिलिप्स एक नीदरलैंड की कंपनी है
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➡ सैमसंग एक दक्षिण कोरियाई की कंपनी है
➡ एलजी एक दक्षिण कोरियाई कंपनी है
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➡ नोकिया एक फिनलैंड कंपनी है


बहुत हो चुका, अब समय आ गया है की हम चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर उसे उसी की भाषा में जबाव दे ।

क्या आप जानते हैं; हरियाणा के वर्तमान शहरों के प्राचीन नाम

 

वर्तमान नाम – प्राचीन नाम
1. जीन्द – जयन्तपुरी
2. सोनीपत – शोणप्रस्थ
3. असन्ध – असन्धिवत
4. पिंजौर – पंचमपुर
5. महम -महेस्थ
6. हाँसी – आशी
7. पलवल – अपलवा
8. रेवाङी – रवावाङी
9. महेन्द्रगढ – कान्नौङ
10. सफीदों – सर्पदमन
11. अग्रोहा – अग्रोदका
12. बहादुरगढ – शरफाबाद
13. पेहोवा – पृथूदक
14. गोहाना – गवन मोहाना
15. जगाधरी – युगन्धर
16. कालका – कालकूट
17. थानेसर – स्थण्वीश्वर
18. कैथल – कपिल स्थल
19. कुरुक्षेत्र – शर्यणवत
20. अम्बाला – अम्वाला।
21. गुङगाँव – गुरुग्राम
22. औरंगाबाद – प्रकृतनाक
23. नारनौल – नरराष्ट्र
24. रोहतक – रोहिताश
25. सिरसा – शैरीषकम
26. फतेहाबाद – इकदार… ✌️