हरियाणवी कविता: हवा सिंह के लिखी हाथ की / रणवीर सिंह दहिया

  हवा सिंह के लिखी हाथ की चिट्ठी तेरी आई रै।। तम्बू के म्हां पढ़ी खोल कै खुशी गात मैं छाई रै।। दुनिया गावै राजे रानी या तो मेरी मजबूरी सै किसान और फौजी पै गाणा बहोतै घणा जरूरी सै दुनिया कहती […]

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हरियाणवी कविता: नल दमयन्ती की गावै तूं / रणवीर सिंह दहिया

  नल दमयन्ती की गावै तूं कद अपनी रानी की गावैगा।। नल छोड़ गया दमयन्ती नै तूं कितना साथ निभावैगा।। लखमीचन्द बाजे धनपत नल दमयन्ती नै गावैं क्यों पूरणमल का किस्सा हमनै लाकै जोर सुणावैं क्यों अपणी राणी बिसरावैं क्यों कद खोल […]

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हरियाणवी कविता: रौवे मतना प्रेम कौर / रणवीर सिंह दहिया

  रौवे मतना प्रेम कौर मैं तावल करकै आ ल्यूंगा।। थोड़े दिन की बात से प्यारी फौज मैं तनै बुला ल्यूंगा।। भेज्या करिये खबर बरोणे की, जरूरत नहीं तनै इब रोेणे की सोचिये मतना जिन्दगी खोणे की, ना मैं भी फांसी खा […]

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हरियाणवी कविता: करुं बिनती हाथ जोड़ कै / रणवीर सिंह दहिया

  करुं बिनती हाथ जोड़ कै मतना फौज मैं जावै।। मुष्किल तैं मैं भरती होया तूं मतना रोक लगावै।। एक साल मैं छुटी आवै होवै मेरै समाई कोन्या चार साल तैं घूम रहया आड़ै नौकरी थ्याई कोन्या बनवास काटना दीखै सै कदे […]

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हरियाणवी कविता: मेहर सिंह लखमी दादा / रणवीर सिंह दहिया

  मेहर सिंह लखमी दादा एक बै सांपले मैं भिड़े बताये।। लखमी दादा नै मेहरु धमकाया घणे कड़े षब्द सुनाए।। सुण दिल होग्या बेचैन गात मैं रही समाई कोन्या रै बोल का दरद सहया ना जावै या लगै दवाई कोन्या रै सबकै […]

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हरियाणवी कविता: सांटा ठा लिया बाबू नै / रणवीर सिंह दहिया

  सांटा ठा लिया बाबू नै कांपी मेहर सिंह की काया।। तूं सांगी बणणा चाहवै कोण्या असली मां का जाया।। तेरे गाणे और बजाणे नै मानै मेरा शरीर नहीं बैंजू घड़वा किस्सा रागनी किसानां की तासीर नहीं सांटा मारकै बोल्या मनै बणाणा […]

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हरियाणवी कविता: बन्धे उपर नागन काली / रणवीर सिंह दहिया

  बन्धे उपर नागन काली डटगी फण नै ठाकै। सिर तै उपर कस्सी ठाई मारी हांगा लाकै।। नागन थी जहरीली वा फौजी का वार बचागी दे फुफकारा खड़ी हुई आंख्यां मैं अन्धेर मचागी दो मिनट मैं खेल रचागी चोट कसूती खाकै।। हिम्मत […]

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हरियाणवी कविता: खरखोदे धोरै सोनीपत मैं / रणवीर सिंह दहिया

  खरखोदे धोरै सोनीपत मैं, बरोणा नाम सुण्या होगा। इसे गाम का रहणे आला, मेहरसिंह नाम सुण्या होगा।। पैदा कद सी हुया मेहरसिंह, तारीख कोण्या याद मेरै फौज के मां भरती होग्या, बणाण गाण का शोक करै बुराई तै रहया दूर परै, […]

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हरियाणवी रागनियाँ

हरियाणवी साहित्य लिपिबद्ध न होने के कारण नगण्य ही माना जाता है लेकिन हरियाणवी लोक-साहित्य बहुत समृद्ध है। हरियाणवी लोक साहित्य में हरियाणवी किस्से कहानी लोक कथाओं का विशेष महत्व है। लोक-कथाएं प्राचीन काल से प्रचलित हैं और आज भी देहात में […]