हरियाणवी कविता: मैं छात पे खड़ा था वा भी छात पे खड़ी थी

मैं छात पे खड़ा था
वा भी छात पे खड़ी थी
बस नुहे मेरी उसपे नजर पड़ी थी
मैं उस ओड़ मुह करके खड़ा था
वा इस ओड़ मुह करके खड़ी थी
पर दोनुआ के बीच में एक गड़बड़ी थी
मैं अपनी छात पे खड़ा था
वा अपनी छात पे खड़ी थी
ना उसने मैं दिखा,
ना मन्ने उसका मुह दिखा
क्युकी मैं भी रात ने खड़ा था
और वा भी रात ने खड़ी थी
मैं खड़ा खड़ा नु सोचु था
वा छात पे क्यूँ खड़ी थी
छात पे खड़ी थी तो खड़ी थी
पर छात पे रात ने क्यूँ खड़ी थी
मन्ने एक काकर उठाई,
उस की ओड़ बगाई
वा काकर भी जाके उसके धोरे पड़ी थी
वा चांदणे में आई तो
उसके मुह पे नजर पड़ी थी
ओह तेरी के होगी बड़ी गड़बड़ी थी
जिसने मैं नू सोचु था के वा खड़ी थी
वा तो उसकी माँ खड़ी थी
मैं छात पे ते भाग के निचे आया
गली में देखा तो ताऊ भरतु हांडता पाया
जब मेरी नजर ताऊ भरतु पे पड़ी थी
तो मेरे समझ में आया के गड़बड़ी थी
वा इतनी रात ने छात पे क्यूँ खड़ी थी
वा इतनी रात ने छात पे न्यू खड़ी थी

ले भागवान और लिख वाले म्हारे पे काव्यांश।

एक बर की बात है अक नत्थू के पड़ौस मैं
कवि आकै रहण लाग्या।
जान-पिछाण काढण खात्तर नत्थू की बहू
रामप्यारी उनके घरां आन-जान लाग्गी।

जद उसनैं नयी पड़ौसन तैं बूज्झी अक
जीज्जी तेरा घरआला के काम करै है
तो वा बोल्ली-
यो कवि है अर मेरै पै रोज नई-नई
कविता लिखै है।

रामप्यारी तो भीतर ए भीतर
कती बलगी अर घरां आकै नत्थू तैं
उलाहना देते होये
बोल्ली- देख सारे जने अपनी-अपनी लुगाई नैं
सरहावैं सैं,
गाने अर कविता लिख-लिख कै रिझावैं सैं,
कदे दो अक्षर तैं भी मेरे बारे मैं बोल
दिया कर। वा नत्थू कै भूंडी ढाल पाच्छै
लाग ली।

दुखी होकै नत्थू बोल्या अक आज रात नैं
तेरे पै एक रचना गढ़ द्यूंगा। रात होते
ही रामप्यारी मचल कै बोल्ली- सुणा दे ईब
तो के गढ्या है तन्नैं?

नत्थू बोल्या-
आंख्या मैं तरै ढिड़ भरी रह,
पर तू मृगनयनी सी लागै।

चालणा तन्नैं आवै कोनीं
पर तू हिरणी सी लागै।

तेरे रूप की के तारीफ करूं ए रूपमती,

बारहां मन की धोबण है पर
ऐश्वर्या सी लागै।

कंप्यूटर अर हरियाणा आला का पुराना ऐ बैर सै। ….

छोरा अपनी गर्ल फ्रेंड तै मोबाइल पे बात कर के कंप्यूटर चलाना सिखावे था…

छोरा : माई लव कम्पुटर पै राईट क्लिक कर….

छोरी : हाँ… कर दिया…

छोरा : ऑप्शन खुलगे होंगे….?

छोरी : हां… खुल_रे है..

छोरा : ईब ऊपर देख के है..?

छोरी : पंखा…..?

छोरा : ????? लटकजा फेर मेरी सासु की ???…..।।।