हरियाणवी कविता: मैं छात पे खड़ा था वा भी छात पे खड़ी थी

मैं छात पे खड़ा था वा भी छात पे खड़ी थी बस नुहे मेरी उसपे नजर पड़ी थी मैं उस ओड़ मुह करके खड़ा था वा इस ओड़ मुह करके खड़ी थी पर दोनुआ के बीच में एक गड़बड़ी थी मैं अपनी […]

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ले भागवान और लिख वाले म्हारे पे काव्यांश।

एक बर की बात है अक नत्थू के पड़ौस मैं कवि आकै रहण लाग्या। जान-पिछाण काढण खात्तर नत्थू की बहू रामप्यारी उनके घरां आन-जान लाग्गी। जद उसनैं नयी पड़ौसन तैं बूज्झी अक जीज्जी तेरा घरआला के काम करै है तो वा बोल्ली- […]

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कंप्यूटर अर हरियाणा आला का पुराना ऐ बैर सै। ….

छोरा अपनी गर्ल फ्रेंड तै मोबाइल पे बात कर के कंप्यूटर चलाना सिखावे था… छोरा : माई लव कम्पुटर पै राईट क्लिक कर…. छोरी : हाँ… कर दिया… छोरा : ऑप्शन खुलगे होंगे….? छोरी : हां… खुल_रे है.. छोरा : ईब ऊपर […]

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