हरियाणवी कविता: खड़ी लुगाइयां के मांह सुथरी श्यान की बहू / ज्ञानी राम शास्त्री

  खड़ी लुगाइयां के मांह सुथरी श्यान की बहू पर थी कर्म हीन कंगाल किसान की बहू गळ में सोने का पैंडल या हार चाहिए था बिन्दी सहार बोरळा सब शिंगार चाहिए था सूट रेशमी चीर किनारीदार चाहिए था इसी इसी नै […]

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हरियाणवी कविता: गऊ कहाया करते थे भारत के लोग लुगाई / ज्ञानी राम शास्त्री

  गऊ कहाया करते थे भारत के लोग लुगाई जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई बण कै जोंक लहू चूसैं यें साहूकार देश के भूखे नंगे फिरैं बेचारे ताबेदार देश के कोठी बंगलां म्हं रहते असली गद्दार देश के आंख मीच […]

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हरियाणवी कविता: मात पिता के मरें बाद आंसू टपकाकै के होगा / ज्ञानी राम शास्त्री

  मात पिता के मरें बाद आंसू टपकाकै के होगा जिन्दें जी जूते मारे फेर फूल चढ़ाकै के होगा कहणा मन्या नहीं कदे फेर तिलक लगणा ठीक नहीं छुए कोन्या पैर कदे फेर शीश झुकाणा ठीक नहीं राखे सदा अन्धेरे म्हं फेर […]

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हरियाणवी कविता: उथल पुथल मचगी दुनियां म्हं / ज्ञानी राम शास्त्री

  उथल पुथल मचगी दुनियां म्हं, निर्धन लोग तबाह होग्ये कोए चीज ना सस्ती मिलती, सबके ऊंचे होग्ये असली चीज मिलै ना टोही, सब म्हं नकलीपण होग्या बिना मिलावट चैन पड़ै, सब का पापी मन होग्या दिन धोळी ले तार आबरु जिसकै […]

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हरियाणवी कविता: कात्तक बदी अमावस आई, दिन था खास दिवाळी का / ज्ञानी राम शास्त्री

  कात्तक बदी अमावस आई, दिन था खास दिवाळी का आंख्यां के म्हां आंसू आग्ये, घर देख्या जब हाळी का सभी पड़ौसी बाळकां खातर, खील-खेलणे ल्यावैं थे दो बाळक देहळियां म्हं बैठे, उनकी तरफ लखावैं थे जळी रात की बची खीचड़ी, घोळ […]

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जीवन परिचय; ज्ञानी राम शास्त्री और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

    जींद जिले के गांव अलेवा में सन् 1923 में जन्म। भिवानी और अमृतसर से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। ओरियंटल कॉलेज, लाहौर से शास्त्री की परीक्षा पास करके लायलपुर चले गए। 1946 में सांप्रदायिक दंगों के कारण गांव अलेवा में आ […]

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