हरियाणवी कविता: मनै पाट्या कोण्या तोल / रणवीर सिंह दहिया

  मनै पाट्या कोण्या तोल, क्यों करदी तनै बोल नहीं गेरी चिट्ठी खोल, क्यों सै छुट्टी मैं रोल मेरा फागण करै मखोल, बाट तेरी सांझ तड़कै।। या आई फसल पकाई पै, या जावै दुनिया लाई पै लागै दिल मेरे पै चोट, मैं […]

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हरियाणवी कविता: माणस की ज्यान बचावैं अपणी / रणवीर सिंह दहिया

  माणस की ज्यान बचावैं अपणी ज्यान की बाजी लाकै।। फेर बी सम्मान ना मिलता लिखदे अपणी कलम चलाकै।। मरते माणस की सेवा मैं हम दिन और रात एक करैं भुला दुख और दरद हंसती हंसती काम अनेक करैं लोग क्यों चरित्रहीन […]

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हरियाणवी कविता: तनै घणी सताई क्यों / रणवीर सिंह दहिया

  नै घणी सताई क्यों बाट दिखाई जमा निस्तरग्या निरभाग बोल्या बैठ मुंडेरे काग।। के बेरा तनै पिया जी मैं दिन काटूं मर पड़कै हो परेशानी दिन रात रहै मैं रोउं भीतर बड़कै हो तेरी फौज की नौकरी दखे कुणक की ढालां […]

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हरियाणवी कविता: सिंघापुर मैं फंस्या मेहरसिंह / रणवीर सिंह दहिया

  सिंघापुर मैं फंस्या मेहरसिंह याद जाटणी आई।। मन मैं घूमै गाम बरोना रात काटणी चाही।। जर्मन और जापान फौज का बढ़ता आवै घेरा था भारत के फौजी भाई अंग्रेज फौज का डेरा था सिंघापुर काट्या दुनिया तै पुल काट कै गेरया […]

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हरियाणवी कविता: सन पैंतीस मैं गया फौज / रणवीर सिंह दहिया

  सन पैंतीस मैं गया फौज मैं कोण्या आया मुड़कै।। आज बी मेरै धेखा सा लागै जणों लिकड़या हो जड़कै।। जाइयो नाश गरीबी तेरा हाली फौजी बणा दिया फौज मैं भरती होकै उसनै नाम अपणा जणा दिया पैगाम सबतैं सुणा दिया था […]

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हरियाणवी कविता: तेरी छाती का पिया हुआ / रणवीर सिंह दहिया

  तेरी छाती का पिया हुआ मनै दूध लजाया री।। लोरी दे दे कही बात तनै केहरी शेर बणाया री।। साधु भेष मैं लाखों रावण देश मैं कूद रहे सैं पंडित मुल्ला सन्त महन्त पी सुलफा सूझ रहे सैं पत्थर नै क्यों […]

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हरियाणवी कविता: लाल चूंदड़ी दामण काला / रणवीर सिंह दहिया

  लाल चूंदड़ी दामण काला, झूला झूलण चाल पड़ी। कूद मारकै चढ़ी पींग पै देखै सहेली साथ खड़ी।। झोटा लेकै पींग बधई, हवा मैं चुंदड़ी लाल लहराई उपर जाकै तले नै आई, उठैं दामण की झाल बड़ी।। पींग दूगणी बढ़ती आवै, घूंघट […]

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हरियाणवी कविता: एक बख्त इसा आवैगा / रणवीर सिंह दहिया

  एक बख्त इसा आवैगा ईब किसान तेरे पै। राहू केतू बणकै चढ़ज्यां ये धनवान तेरे पै।। म्हारी कमाई लूटण खातर झट धेखा देज्यां रै भाग भरोसे बैठे रहां हम दुख मोटा खेज्यां रै धरती घर कब्जा लेज्यां रै बेइमान तेरे पै।। […]

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हरियाणवी कविता: गुलाम देष मैं जन्म लिया / रणवीर सिंह दहिया

  गुलाम देष मैं जन्म लिया देई देष की खातर कुरबानी दिमाग मैं घूमें जावै मेरै थारी खास टोपी की निषानी बदेष गये पढ़ने खातर आई सी एस पास करी उड़ै देख नजारे आजादी के आकै डिग्री पाड़ धरी भारत की आजादी […]

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हरियाणवी कविता: मोलड़ बता बता कै / रणवीर सिंह दहिया

  मोलड़ बता बता कै तेरा आत्मविष्वास खो राख्या सै।। अन्नदाता कैह कैह कै घणा कसूता भको राख्या सै।। उबड़ खाबड़ खेत संवारे खूब पसीना बहाया रै माटी गेल्यां माटी होकै नै भारत मैं नाम कमाया रै तेरी मेहनत की कीमत ना […]

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