हरियाणवी कविता: रेगुलर नौकरी पाना कोन्या कति आसान बताऊँ मैं / रणवीर सिंह दहिया

  रेगुलर नौकरी पाना कोन्या कति आसान बताऊँ मैं।। सी ऍम ऍम पी सब धोरै पाँच साल तैं धक्के खाऊँ मैं।। (टेक) पहलम कहवैं थे टेस्ट पास करे पाछै तूं बताईये पास करे पाछै बोले पहले चालीस गये बुलाईये एक विजिट चार […]

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हरियाणवी कविता: म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया / रणवीर सिंह दहिया

  म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया आर्थिक उन्नति करी कम लिंग अनुपात नै खाया (टेक) छाँट कै मारें पेट मैं लडकी समाज के नर नारी समाज अपनी कातिल की माँ कै लावै जिम्मेदारी जनता हुइ सै हत्यारी पुत्र […]

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हरियाणवी कविता: साम्राज्यवाद के निशाने पै युवा लड़के और लड़की / रणवीर सिंह दहिया

  साम्राज्यवाद के निशाने पै युवा लड़के और लड़की बेरोजगारी हिंसा और नशा घंटी खतरे की खडकी (टेक) सही बातों तैं धयान हटा कै नशे का मंतर पकडाया लड़की फिरती मारी मारी समाज यो पूरा भरमाया ब्यूटी कंपीटीसन कराकै देई लवा ऐश […]

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हरियाणवी कविता: किसे और की कहाणी कोन्या इसमैं राजा रानी कोन्या / रणवीर सिंह दहिया

  किसे और की कहाणी कोन्या इसमैं राजा रानी कोन्या सै अपनी बात बिराणी कोन्या, थोड़ा दिल नै थाम लियो।। यारी घोड़े घास की भाई, नहीं चलै दुनिया कहती आई मैं बाऊं और बोऊं खेत मैं, बाळक रुळते मेरे रेत मैं भरतो […]

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हरियाणवी कविता: जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै / रणवीर सिंह दहिया

  जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै। भाई का भाई बैरी क्यों होग्या नहीं समझ मैं पाया रै॥ गरीब जाट के बेटा-बेटी रैहगे बिना पढ़ाई क्यों गरीब जाट की बहू मरती आज बिना दवाई क्यों गरीब जाट की […]

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हरियाणवी कविता: पोह का म्हिना रात अन्धेरी, पड़ै जोर का पाळा / रणवीर सिंह दहिया

  पोह का म्हिना रात अन्धेरी, पड़ै जोर का पाळा सारी दुनिया सुख तैं सोवै मेरी ज्यान का गाळा सारे दिन खेतां के म्हां मनै ईख की करी छुलाई बांध मंडासा सिर पै पूळी, हांगा लाकै ठाई पूळी भारया जाथर थोड़ा चणक […]

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हरियाणवी कविता संग्रह: किस्सा फौजी मेहर सिंह / रणवीर सिंह दहिया

  जिला रोहतक के गांव बरोणा में 11 मार्च 1950 को जन्म। 1971 में एम. बी.बी.एस तथा 1977 में एम.एस की। सामाजिक बदलाव के कार्यों में नेतृव्य। हरियाणवी में कहानी एवं उपन्यास लेखन। समसामयिक विषयों और जन-नायकों पर सैंकड़ो रागनियां व किस्सों […]

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जीवन परिचय; रणवीर सिंह दहिया और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

  जिला रोहतक के गांव बरोणा में 11 मार्च 1950 को जन्म। 1971 में एम. बी.बी.एस तथा 1977 में एम.एस की। सामाजिक बदलाव के कार्यों में नेतृव्य। हरियाणवी में कहानी एवं उपन्यास लेखन। समसामयिक विषयों और जन-नायकों पर सैंकड़ो रागनियां व किस्सों […]

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हरियाणवी कविता: कांग्रेस क्यों छोडडी तनै / रणवीर सिंह दहिया

  कांग्रेस क्यों छोडडी तनै इतना तो मनै बताईये तूं।। गर्म दल क्यों बनाया था इतना मनै समझाईये तूं।। के हालात बणे बोस इसे जो कांग्रेस छोड़नी पड़गी सबतैं बडडी पार्टी तैं क्यों तनै बात मोड़नी पड़गी एक एक बात आछी ढालां […]

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हरियाणवी कविता: ध्यान लगाकै सुणिये बेटा / रणवीर सिंह दहिया

  ध्यान लगाकै सुणिये बेटा कहै बाबू नन्दराम तेरा।। लंदन आले राज करैं सैं हो लिया देश गुलाम तेरा।। मास्टर धोरैे ईस्ट इन्डिया का तनै नाम सुण्या होगा। इमदाद करैं व्यापार फैला कै उनका काम सुण्या होगा। कारीगरां के हाथ कटा दिये […]

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