हरियाणवी कविता: मैं छात पे खड़ा था वा भी छात पे खड़ी थी

मैं छात पे खड़ा था वा भी छात पे खड़ी थी बस नुहे मेरी उसपे नजर पड़ी थी मैं उस ओड़ मुह करके खड़ा था वा इस ओड़ मुह करके खड़ी थी पर दोनुआ के बीच में एक गड़बड़ी थी मैं अपनी […]

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ले भागवान और लिख वाले म्हारे पे काव्यांश।

एक बर की बात है अक नत्थू के पड़ौस मैं कवि आकै रहण लाग्या। जान-पिछाण काढण खात्तर नत्थू की बहू रामप्यारी उनके घरां आन-जान लाग्गी। जद उसनैं नयी पड़ौसन तैं बूज्झी अक जीज्जी तेरा घरआला के काम करै है तो वा बोल्ली- […]

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कंप्यूटर अर हरियाणा आला का पुराना ऐ बैर सै। ….

छोरा अपनी गर्ल फ्रेंड तै मोबाइल पे बात कर के कंप्यूटर चलाना सिखावे था… छोरा : माई लव कम्पुटर पै राईट क्लिक कर…. छोरी : हाँ… कर दिया… छोरा : ऑप्शन खुलगे होंगे….? छोरी : हां… खुल_रे है.. छोरा : ईब ऊपर […]

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आक्खर पड़ा स ताऊ भी जमा

हरियाणा के एक बाग़ में एक प्रेमी प्रेमिका का जोड़ा बेंच पे बैठा था । प्रेमिका बोली – तुम बहुत Cool हो । प्रेमी बोला – तुम भी बहुत Hot हो । तभी पीछे से एक ताऊ आवाज आई “मैं तो न्यूं […]

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म्हारी बोली सीख के दिखा दो

कम्बल के बाल न लफूसडा कह दयां, जुत्यां न हम खोसडा कह दयां नुक्सान होवे तो याता कह दयां शादी-शुदा न ब्याहता कह दयां सास न हम सासू कह दयां आच्छे मानस न धांसू कह दयां अर ख़त न कह दयां चिठ्ठी- […]

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भाभी कई बार चक्कर काटगी भाई

काल 7 बजे सिक पड़ोस की एक भाभी घरा आयी, मने दरवाजा खोला तो वा बोली:- कोई बात ना जी मैं फिर आ जाऊँगी। मनै दरवाजा बंद कर दिया। 7:30 बजे दोबारा आई,दरवाजा खोलते ए बोली:-कोई बात नही जी मैं थोड़ी हान […]

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हरियाणवी कविता: जगह देख कै बाग़ लगा दिया छोटी-छोटी क्यारी / लखमीचंद

  जगह देख कै बाग़ लगा दिया छोटी-छोटी क्यारी। तरह तरह के फूल बाग में, खुश्बो न्यारी-न्यारी।|(टेक) दो दरवाजे गड़े बाग़ में देख्या भीतर बड़-कै, एक पानी का चलै फुहारा, मन चाहवै जब छिडकै, माणस राख लिया बाग़ बीच में, बाग़ का […]

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