हरियाणवी कविता: के दुनियां मैं आई सो सब नरक कै बीच सड़ी सो / हरिचन्द

  के दुनियां मैं आई सो सब नरक कै बीच सड़ी सो हे ना कदर म्हारी सै कुए बीच पड़ी सो जन्म होण तै पहलां गळ पै करदें सैं खड़ी कटारी गरभ बीच म्हं मरवा दें सैं चालै सैं तेग दुधारी बहुत […]

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हरियाणवी कविता: तेरा मेरा एक शरीर सै रे / हरिचन्द

  तेरा मेरा एक शरीर सै रे, मां का जाया बीर सै रे ल्या कुछ फूल धराई दे बहण भाई का प्यार जगत म्हं, इसा और नहीं संसार जगत म्हं फेर बड़ा व्यवहार जगत म्हं, जो चलता रहै लगातार जगत म्हं इसी […]

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हरियाणवी कविता: आपस मैं हम लड़ां लड़ाई या असल कहाणी कोन्या / हरिचन्द

  आपस मैं हम लड़ां लड़ाई या असल कहाणी कोन्या म्हारै उल्टी शिक्षा ला राखी ईब तक जाणी कोन्या के तूं मेरा लेर्या सै मैं के खोसूं सुं तेरा होरे सां कंगाल फेर भी कररे मेरी मेरा नर्क म्हं म्हारा बसेबा होग्या […]

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हरियाणवी कविता: सुण मजदूर किसान मान तेरी दुख मैं ज्यान घली है / हरिचन्द

  सुण मजदूर किसान मान तेरी दुख मैं ज्यान घली है सारा कुणबा मंड्या रहै सै फेर भी सुख का सांस कोन्या एक बख्त टुकड़ा मिलज्या तो दुसरे की तनै आस कोन्या लाकड़ होग्या तेरे शरीर का रह्या गात पै मांस कोन्या […]

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हरियाणवी कविता: उल्टी गंगा पहाड़ चढा दी इसा नजारा देख लिया / हरिचन्द

  उल्टी गंगा पहाड़ चढा दी इसा नजारा देख लिया खेती करता भूखा मरता किसान बिचारा देख लिया एक मिन्ट की फुरसत ना तूं 24 घन्टे काज करै रोटी ऊपर नूण मिर्च फेर धरया मिलै सै प्याज तेरै काम की बाबत सब […]

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जीवन परिचय; हरिचन्द और उनका हरयाणवी कविता संग्रह

  जिला जींद में सफीदों के पास हाट गांव निवासी हरिचंद का जन्म 16 अक्टूबर 1941 को हुआ। गांव से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। राज मिस्त्री का काम करते थे और आरा मशीन चलाते थे। सन् 1980 से वामपंथी आंदोलन से जुड़े […]

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