हरियाणवी कविता बेटी के पराई हो सै

  छोटी छोटी बात पै बेशक कितनी ए लड़ाई हो सै आदमी की सबसे बड़ी हिम्मत उसकी लुगाई हो सै पत्थर की भी छाती चीर दे सच में तारे तोड़ ल्यावे अगर मेहनतकश की सच्ची हौसला अफजाई हो सै किसे की हाय […]

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म्हारा हरियाणा – हरियाणवी संस्कृति साहित्य व भाषा को समर्पित एक प्रयास

  क्या आप ऐसी भूमि की कल्पना कर सकते हैं जहां परिवार के धन का निर्धारण इस बात से होता है की परिवार में गायों की संख्या कितनी है! जहां हर सुबह सूरज हरी धान के खेतों पर अपनी किरणों का रंग […]

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कितै ना दिखी सांझी माइ

  छोरी माट्टी ल्याया करती मुह अर हाथ बणाया करती गोबर तै चिपकाया करती नू सांझी बणाया करती कंठी कड़ूले पहराया करती आखं मै स्याही लाया करती चूंदड़ भी उढाया करती नू सांझी नै सजाया करती रोज सांझ नै आया करती गीत […]

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